आ जाओ कृष्ण कन्हाई

1 0
Read Time1 Minute, 13 Second

आ जाओ अब कृष्ण कन्हाई
फिर धरती पर आ जाओ

तुम्हे बुलाती ब्रज की नारी
अब धरती पर आ जाओ।

हुई है बोझल पृथ्वी सारी
सहते सहते अत्याचार।

बढ़ रही है पाप की दुनियां
नित होता कन्याओं से व्यभिचार।

आ जाओ अब कृष्णा मेरे
ले चक्र सुदर्शन हाथों में।

दण्डित कर दो इन दानव को
जो बहन ,बेटियां को छूते हैं।

फिर तैयार करो पाण्डु सेना को
जो गांडीव उठा सके।

अपनो के भी खिलाफ ,
पाप की बलि चढ़ा सके।

नही होगी फिर कोई दौर्पद
भरी सभा मे अपमानित।

कौरव नही होंगे ,पांडव पर भारी। खुशहाल होने की अब गरीबों की बारी

चारो तरफ फिर से होगी हरियाली।
गायों को फिर से पूजा जायेगा।

फिर हर बच्चा माखन मिश्री खायेगा।
दूध -दही की बहेंगी नदियां।

धन्य धन्य ब्रज गांव हो जायेगा।।

#संध्या चतुर्वेदी
अहमदाबाद, गुजरात

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

पिता और बेटा

Sat Aug 24 , 2019
मजदूरी करके भी हमको उसने पढ़ाया है । कचौड़ी के बदले उसने सूखी रोटी खाया है । हम पढ़-लिखकर इन्सान बनेंगे, यह उम्मीद उसने खुद में जगाया है । जब पिया सिगरेट बेटा,देख वह शरमाया है । उसने नशा का मूँह ना देखा,बेटे ने शिखर आज चबाया है । उसकी […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।