ज्ञान का दीप जलाओ तो..

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naveen mani
जहर कुछ जात का लाओ तो कोई बात बने।
आग  मजहब  से लगाओ  तो कोई बात बने॥
देश की शाख़ मिटाओ तो कोई बात बने।
फ़स्ल नफ़रत की उगाओ तो कोई बात बने॥
सख़्त लहजे में अभी बात न कीजै उनसे।
मोम पत्थर को बनाओ तो कोई बात बने॥
अब तो गद्दार सिपाही की विजय पर यारों।
याद में जश्न मनाओ तो कोई बात बने॥
जात के नाम अभी तीर बहुत तरकश में।
अमन को और मिटाओ तो कोई बात  बने॥
बस सियासत में अटक जाए न वो बिल वाजिब।
शोर संसद में मचाओ तो कोई बात बने॥
इस तरह फर्ज निभाने की जरूरत क्या है।
साथ ता-उम्र निभाओ तो कोई बात बने॥
रस्म करते हो अदा खूब ज़माने भर की।
हाथ दिल से जो मिलाओ,तो कोई बात बने॥
जिंदगी कर्ज चुकाने में गुज़र जाती है।
चैन कुछ ढूंढ के लाओ तो कोई बात बने॥
कर गई तुझको जो मशहूर मुक़द्दर बनकर।
वो ग़ज़ल आज सुनाओ तो कोई बात बने॥
घर जलाना तो बड़ी बात नहीं है साहिब।
एक घर अपना बनाओ तो कोई बात बने॥
यूँ दिवाली के चिरागों से भला क्या होगा।
ज्ञान का दीप जलाओ तो कोई बात बने॥

                  #नवीन मणि त्रिपाठी

परिचय : नवीन मणि त्रिपाठी कानपुर(उत्तरप्रदेश)के अर्मापुर रियासत में रहते हैंl आपका जन्म १९७५ का हैl 

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।