आ जाओ अब कृष्ण कन्हाई फिर धरती पर आ जाओ तुम्हे बुलाती ब्रज की नारी अब धरती पर आ जाओ। हुई है बोझल पृथ्वी सारी सहते सहते अत्याचार। बढ़ रही है पाप की दुनियां नित होता कन्याओं से व्यभिचार। आ जाओ अब कृष्णा मेरे ले चक्र सुदर्शन हाथों में। दण्डित […]

हे सदा शिव, हे अंतरयामी हे महाकाल, हे त्रिपुरारी हे नागेश्वर ,हे रुद्राय हे नीलकंठ ,हे शिवाय हे शिव शम्भू ,हे प्रतिपालक हे दयानिधि ,हे युग विनाशक हे गौरी पति,हे कैलाशी हे काशीवासी, हे अविनाशी हे पिनाकी ,हे कपाली हे कैलाशी, हे जगतव्यापी हे गंगाधराय ,हे जटाधराय हे जगतपिता,हे सर्वव्यापी […]

बहुत याद आता है मुझको वो यमुना किनारा। वो नीला सा पानी,वो बहती सी धारा। वो पावन  सी भूमि,वो मथुरा हमारा।। सुबह सवेरे वो मन्दिर को जाना, वो यमुना किनारे घँटों बिताना।। वो बचपन की मस्ती,वो बहता सा पानी।। बहुत याद आता है मुझ को यमुना किनारा। वो बहनों के […]

शब्द शब्द में सोचा तुम को फिर अक्षर अक्षर याद किया। प्रिय तुम्हारी खामोशी का ऐसे मैने एहसास किया।। तुम पर जब भी गीत लिखा। उस को लिखकर चुम लिया।। प्रिय तुम्हारी यादों को फिर अंतस मन से याद किया।। जहाँ मिले थे हम तुम पहले उस पल को फिर […]

धन्य हुई अवध पूरी,जन्मे राजा राम। राम जन्म से बिगड़े हुए, बने सभी काम।। राम जन्म की बधाई, मिल रही चारो ओर से। धन्य हुई कौशल्या माई ,दे जन्म श्री राम को। विस्मित हुई  मात जब दर्शन दिए विराट रूप केे। कर जोड़ किया विनय ,ले लो अवतार पुनः निज […]

हो रहा अत्याचार मासूमों पर माँ, बिलख रही किलकारी है माँ। ले कर के खड्ग और त्रिशूल माँ, दुष्टों के शीश भेट चढ़ा जाओ। हे माँ प्रचंड रूप धर आ जाओ।। तब कोख में मरती थी कन्या अब तो जन्म के बाद उजड़ती है । पैदा करने वाला बन गया […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।