प्रेरणा

mamta bairagi
” एक शिक्षक ऐसा भी जो नित नयें नवाचारों से सरकारी स्कूल को बेहतर बनाने में जुटा हुआ हैं । “
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जी हां  ! हम बात कर रहे हैं शासकीय नवीन प्राथमिक विद्यालय नयापुरा माकनी में पदस्थ सहायक अध्यापक गोपाल कौशल की , जिन्हें जुनून है सरकारी स्कूल को बेहतर बनाने का । उन्हें जो गांव या शाला मिली उसे वह ऐसी बनाने जुटे हैं कि वह उसमें पढने वाले बच्चे भयमुक्त वातावरण में खेल-खेल में गतिविधियों, बालगीतों के माध्यम से बोल उठे । आज के इस दौर में जहां कुछ शिक्षक केवल वेतन भोगी बनकर रह गये हैं । वही इनका हौंसला इनकी ईमानदारी और मेहनत , लगन को देखकर हर कोई मंत्र मुग्ध हो जाता है। कारण यह हर समस्या को खुद ही दूर करने पर लगे हुए हैं, ऐसा नही कि हम क्या करें। ओर यही कारण है कि आज सुभाष यादव कागदीपुरा की भांति यह भी अपनी शाला और उसमें पढ़ने वाले बच्चों को ऐसा बनाने में लगे हैं कि जो लोग सरकारी शाला की बुराई करते हैं वह इनकी शाला देखकर दंग रह जाते । पढ़ाई शिक्षक पर निर्भर करती है , न कि सरकारी या प्राइवेट। हमारी सोच को हमें बदलना है। और हर तरह से शासन जो लाभ लेकर  बच्चो को आगे बढ़ना है। कबाड़ से जुगाड़ कर शून्य निवेश नवाचार अपनाते हुए गोपाल कौशल बहुत आगे निकल आये है और सभी के प्रेरणास्रोत बन रहे हैं।
ऐसे शिक्षकों की आज बहुत आवश्यकता होती जा रही है। जो जमीनी स्तर पर ईमानदारी से काम करते हैं । शासन को भी चाहिए ऐसे शिक्षकों का उत्साह बढ़ाते हुए उन्हें प्रोत्साहित करे।
आज गोपाल कौशल जी की जितनी तारीफ की जाए कम ही रहेगी । हमारी शाला ऐसी हो , संपूर्ण ग्राम शिक्षा योजना अंतर्गत दो बार बेहतर शाला प्रबंधन समिति का प्रथम ,स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार से यह शाला पुरुस्कृत हो चुकी । इसके अलावा कौशल देशभर की कई सामाजिक संस्थाओं सहित यूएसए अमेरिका में  सत्यमेव जयते द्वारा भी सम्मानित किया गया हैं । वहीं इनकी पाठ्यक्रम आधारित बालगीत,समसामयिक कविताएं, आलेख देशभर के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों, पत्रिकाओं में नियमित रुप से प्रकाशित हो रही हैं ।
मैं आशीर्वाद देती हूं कि वे इसी तरह  अच्छा कार्य करते रहे। और बच्चो को उन्नति  की ओर ले जाएं ।
                 ममता बैरागी
                    शिक्षिका
        तिरला जिला धार मध्यप्रदेश

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।