Archives for समाज

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साहित्य में नारी का योगदान

हिंदी साहित्य में नारी का योगदान, नारी का जीवन बहुत ही संघर्ष से विरत है महिला साहित्यकारके लिए सबसे पहले बाहरी संदर्भों में उसका आंतरिक समय होता है, जहां वह…
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कुम्भ मेले का इतिहास और अखाड़ा व पेशवाई का महत्व

कुम्भ मेले का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है । कुम्भ दो प्रकार का होता है – अर्ध कुम्भ और पूर्ण कुम्भ या महाकुम्भ । कुम्भ मेले का इतिहास लगभग…
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ये लाल रंग है सृजन का

  पड़ोस के पांडे जी के घर से उनकी पत्नी के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुन कर मेरी नींद टूट गई है। सौतेली मां बेटी पर बुरी तरह बरस रही है।…
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सांस्कृतिक संवेदनहीनता के समय में ‘लोक’

जब समाज में गहरी सांस्कृतिक संवेदनहीनता जड़ें जमा चुकी हो और राजनीति अपने सर्वग्रासी चरित्र में सबसे हिंसक रूप से सामने हो, तो लोक और लोकजीवन की चिंताएं बेमानी हो…
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मनुष्य की हार जीत का दारोमदार मनुष्य के मन पर ही है

मन के हारे हार है,मन के जीते जीत आज सुबह जैसे ही उठी पता नहीं क्यों लगा कि कुछ अप्रिय घटना होने वाली है।  मन डर गया पर मैंने कमर…
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नारी कभी संतुष्ट नहीं हो सकती 

दोस्तों आज में रक बड़ा ही उलझा हुआ विषय लिया है जिस पैट में एक लेख लिखे जा रहा हूँ / जिसके बारे में स्वंय वो भी नहीं जानती, जिस…
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