सिंदूरा और वैभव “लव वर्डस” के नाम से जाने जाते थे. बैकिंग के कोचिंग सेंटर में दोनो की मुलाकात हुई थी. प्रतियोगिता परीक्षा समाप्त होते ही प्यार इतना परवान चढ़ा की दोनो ने शादी कर ली.जब रीजल्ट आया तो सिंदूरा का चूनाव हो गया जबकि वैभव पीछे रह गया था.जल्दी […]

जगत गुरु कहे जाने वाले देश भारत के युवाओं के चहुँमुखी विकास में सबसे बड़ी बाधा है नशा । नशा शब्द सोचते ही दो प्रश्न उठते है – क्यो ? ओर कौन जिम्मेदार है? कुछ लोग इसके लिए व्यक्ति संगती को जिम्मेदार ठहराते है अपितु असल समस्या कुछ और है। […]

कोरोना काल में दुनिया वाकई काफी बदल गई . लॉक डाउन अब अन लॉक की ओर अग्रसर है , लेकिन इस दुनिया में एक दुनिया ऐसी भी है , जो लॉक डाउन और अनलॉक का कायदे से मतलब नहीं जानती . उसे बस इतना पता है कि लगातार बंदी से […]

सुशांतसिंह यह नाम हर जुंबा पर है। शायद जो लोग उस प्रतिभा सम्पन्न लड़के को पहले नहीं जानते थे। वे भी आत्महत्या के बाद उसे जानने लगे। उसके काम की तारीफ करने लगे और आत्महत्या को घिनौना काम बताते हुए दार्शनिक अंदाज में आत्महत्या को कायराना हरकत बता कर अपने […]

एक दिन रामकृष्ण परमहंस शिष्यों के साथ भ्रमण करते हुए एक नदी के तट पर पहुंचे।वहां कुछ मछुए जाल फेंककर मछलियां पकड़ रहे थे।एक मछुए के समीप जाकर स्वामी जी खड़े हो गए और शिष्यों से कहा – तुम लोग ध्यानपूर्वक इस जाल में फंसी मछलियों की गतिविधियां देखो। शिष्यों […]

150 वें जन्मशती वर्ष में वैचारिक भाव सुमन महात्मा गांधी के व्यक्तित्व,कृतित्व और अवदान पर आज भी लेखकों की लेखनी रूकी नहीं है, कवियों और वक्ताओं की वाणी थमी नहीं है। चिंतकों की चिंतनधारा कुंद या मंद नहीं हुई है। कर्मनिष्ठा,भावनिष्ठा और त्यागनिष्ठा को चरितार्थ कर गांधी ने एक ऐसी […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।