मातृ दिवस पर ही क्यों याद आती माताएँ*

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rajesh sharma
    हम प्रतिवर्ष मातृ दिवस मनाते हैं। माता सन्तान को जन्म देती है। नो महीने गर्भ में रखती है। कितना दुख दर्द सहती है। ऐसी अवस्था मे भी घर के सारे काम करती हुई परिवार की देखरेख,बच्चों की देखभाल करती है। माता सहनशक्ति की प्रतीक होती है। वह खुद भूखी रहकर अपनी संतान के लिए हाड़ तोड़ मेहनत करती है। गरीब मजदूर की माताएँ बहने बच्चे को पीठ के पीछे बांधकर मजदूरी करती है।
लू के थपेड़े सहती है। ठण्ड की ठिठुरन सहती है। बारिश में घरों में छत टपकती है वह दुख भी सहती है।
    माँ सृष्टि का आधार है। माँ ईश्वर का दिया वरदान है। माँ सीता सावित्री सी। माँ गार्गी मदालसा सी है। माँ बच्चे की प्रथम गुरु होती है। परिवार ही उसकी प्रथम पाठशाला होती है। माँ उंगली पकड़ चलना सीखाती है। संस्कारों का बीजारोपण करती है माँ। माँ के कदमों में जन्नत होती है। माँ जिसके घर परिवार में होती है वहीं स्वर्ग हो जाता है। वहीं मन्दिर लगने लगता है।
   माँ की दुआएं कभी खाली नहीं जाती है। भगवान श्री राम की माता कौशल्या जी ने उन्हें मर्यादा का पाठ पढ़ाया। आज सारा विश्व उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहता है। बड़ों की सेवा करना सिखाया। आज रामायण से हम बच्चों को ये सब गुण सीखाते हैं। भगवान कृष्ण की माता यशोदा जी ने कर्म की शिक्षा दी। उसी कृष्ण ने गीता ज्ञान देकर विश्व के तमाम लोगों को कर्म पथ पर चला दिया। माता जीजाबाई ने शिवाजी को शिक्षा दी। आगे चलकर वे छत्रपति कहलाये। माताएँ विदुषी हुई माता गार्गी के नाम से सरकार आज भी बालिकाओं को गार्गी पुरस्कार से समान्नित करती है। कई वीरांगनाओं ने इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अपना नाम अंकित करा दिया। झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई को कौन नहीं जानता। वह अमर हो गई। अंग्रेजी सेना से जिसने अकेले ही युद्ध किया था। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी। रानी पद्मनी ने जौहर किया। अपनी आन बान बचाई। माता पन्ना की स्वामिभक्ति देखते ही बनती है।
   इतिहास भरा पड़ा है। माताओं ने देश को नई राह दिखाई है। राजनीति,कला,खेल,ज्ञान,विज्ञान सहित सभी क्षेत्रों में माताओं ने देश का गौरव बढ़ाया है। इसीलिए हम प्रति वर्ष मातृ दिवस मनाते हैं। उनके चरण पूज कर उनसे आशीर्वाद लेते हैं।
    जिन परिवारों में बच्चों के पिता नहीं होते उन्हें माता ही मजदूरी कर पढ़ाते लिखाते हैं। माताएँ जो संस्कार देती है वे ही संस्कार संतान को आगे बढ़ाते हैं। माताओं को चाहिए कि वे बालक बालिकाओं को पर्याप्त समय दें। उन पर नज़र बनाये रखें।
   आज के डिजिटल युग मे माताएँ नोकरी करने जाती है। सुबह निकलती है। देर रात तक घर आती है। बच्चे नोकरों के भरोसे रहते हैं न ढंग से खाते पीते हैं न पढ़ते हैं। भूखे ही सो जाते हैं। धन कमाओ लेकिन थोड़ा समय तो संतान के लिए भी निकालें। भौतिक विलासिता के साधनों को इकट्ठा करने के पीछे रात दिन लोग बस रुपया कमाने में लगे हैं। आज धन को महत्व देने लगे हैं। मां बाप का प्रेम बच्चों को नहीं मिल रहा। आज मातृ दिवस पर सभी संकल्प करें कि हम बालक बालिकाओं को समय देंगे। उनकी पढ़ाई लिखाई में सहयोग करेंगे। आज के बच्चे कुपोषित कमजोर कृशकाय से हो गए हैं। तनाव में रहकर पढ़ रहे हैं। कितनी पढ़ाई कर लो नोकरी नहीं मिलती ये बात दिलो दिमाग मे उनके घर कर गई है। दिखावटी मुस्कराहट रह गई। मन से अब कौन हँसता है। हर शख्स मन ही मन रोता है।
  माँ को लोग वृद्धाश्रम छोड़ आते हैं  ।कई लोग माँ का अपमान करते है ओर सुख भोग करने की मन मे कामना करते हैं। भला कोई माँ को दुख पहुंचा खुश रह सकता है। कदापि नहीं। आओ माँ की सेवा करें।
#राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’
परिचय: राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’ की जन्मतिथि-५ अगस्त १९७० तथा जन्म स्थान-ओसाव(जिला झालावाड़) है। आप राज्य राजस्थान के भवानीमंडी शहर में रहते हैं। हिन्दी में स्नातकोत्तर किया है और पेशे से शिक्षक(सूलिया)हैं। विधा-गद्य व पद्य दोनों ही है। प्रकाशन में काव्य संकलन आपके नाम है तो,करीब ५० से अधिक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा आपको सम्मानित किया जा चुका है। अन्य उपलब्धियों में नशा मुक्ति,जीवदया, पशु कल्याण पखवाड़ों का आयोजन, शाकाहार का प्रचार करने के साथ ही सैकड़ों लोगों को नशामुक्त किया है। आपकी कलम का उद्देश्य-देशसेवा,समाज सुधार तथा सरकारी योजनाओं का प्रचार करना है।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।