पांच मुक्तक

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vikram

1. बसा है जो मेरे मन में वो अब कहने की बारी है

   कि मेरे दिल के आईने में बस सूरत तुम्हारी है
   जो पूछा मैंनें यारों से बताओ क्या हुआ है ये
   कोई कहता मोहब्बत है कोई कहता बीमारी है
2 नहीं आता समझ में ये कि क्यों ऐसा ही होता है
जो होना नापसंद दिल को क्यों वैसा ही होता है
अभी के दौर में इंसान की नहीं कद्र है कोई
इंसानों की कद्रों में तो बस पैसा ही होता है
3 किसी ने तन को अपनाया किसी ने धन को अपनाया
जिसे विश्वास ईश्वर पर भजन किर्तन को अपनाया
मगर एक मन मिला मुझको जो कोरे कागज के जैसा था
मैंनें छोड़कर सबकुछ बस उस मन को अपनाया
3. करो कुछ भी जमाने का ये दस्तूर है लेकिन
    किसी की याद आई थी वो मुझसे दूर है लेकिन
    कमी खलती है फिर भी परेशां नहीं हूं ये सोचकर
    जो मेरे पास मेरे यार हैं कोहीनूर हैं लेकिन
4. जो करता है एक फूल वो गुलदस्ता नहीं करता
    मंजिलें जो करती हैं वो रस्ता नहीं करता
    भले नाते इस संसार में बन जाएं कई गहरे
     तुलना मां के आंचल से कोई रिश्ता नहीं करता
5. बनो सरल कठोरता में रस नहीं आता
    कोई शौक से बन कर के बेबस नहीं आता
    चले गए अगर पैसे तो वे फिर आ भी सकते हैं
     चला जाए कोई इंसान तो वापस नहीं आता
विक्रम कुमार 
 वैशाली(बिहार)
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।