बदला-बदला सा नज़ारा है
फिर किसी ने हमें पुकारा है
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वो शख्स हमें तकता ही नहीं
जो हमको जान से प्यारा है
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मैं मिट्टी का इक जर्रा हूँ
तू आसमान का तारा है
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किसको आवाज़ लगाऊँ अब
तुम बिन न कोई सहारा है
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फुर्सत हो तो आकर देखो
तुम बिन क्या हाल हमारा है
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तू हाथ पकड़ ले मेरा तो
मुझे हर इल्ज़ाम गवारा है
#भरत मल्होत्रा
परिचय :–
नाम- भरत मल्होत्रा
मुंबई(महाराष्ट्र)
शैक्षणिक योग्यता – स्नातक
वर्तमान व्यवसाय – व्यवसायी
साहित्यिक उपलब्धियां – देश व विदेश(कनाडा) के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों , व पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित
सम्मान – ग्वालियर साहित्य कला परिषद् द्वारा “दीपशिखा सम्मान”, “शब्द कलश सम्मान”, “काव्य साहित्य सरताज”, “संपादक शिरोमणि”
झांसी से प्रकाशित “जय विजय” पत्रिका द्वारा ” उत्कृष्ट साहितय सेवा रचनाकार” सम्मान एव
दिल्ली के भाषा सहोदरी द्वारा सम्मानित, दिल्ली के कवि हम-तुम टीम द्वारा ” शब्द अनुराग सम्मान” व ” शब्द गंगा सम्मान” द्वारा सम्मानित
प्रकाशित पुस्तकें- सहोदरी सोपान
दीपशिखा
शब्दकलश
शब्द अनुराग
शब्द गंगा
Sat Mar 16 , 2019
मंजर सुहाना भाने लगा है मुझे याद कोई आने लगा है मुझसे जो रूठ जाता था कभी वो शख्स मुझे ही मनाने लगा है बातें उसकी मुझको अच्छी लगी वो मुझे अब समझाने लगा है बनाके रखी थी ,दूरियां कभी नजदीक कितना आने लगा है मैंने जाना रिश्ते टूटते ही […]