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babulal sharma

प्रभु का जिसे भजन है करना।
मन को सदा  सरल ही रखना।
हर  भारतीय   जन  है  अपने।
अब सिद्ध  होय सब के सपने।

जननी धरा वतन नाज करें।
हम  मानवीय  परिताप हरे।
अरमान वीर  बलिदान करे।
भगवान धीर  मम मान धरे।

रथवान कृष्ण जब गीत कहे।
मन मान पार्थ तब  युद्ध सहे।
नदियाँ   तरे   सतत  वैतरनी।
हमको उन्हे सजल है रखनी।

परिणाम  मान  परखे  रहना।
अनजान राह  तकते  सहना।
हरकाज सिद्ध हित मानवता।
कर  युद्ध  वीर हत  दानवता।

अपना महान यह भारत हो।
हर दुष्ट नीच पर  लानत  हो।
हम कर्म वीर कहलाय सखे।
अब रीत प्रीत हर  मान रखें।

लिख गीत छंद हित मानव के।
शुभ सूत्र धार  बन  आनव के।
डर  देख  हीन  मत  तू बनना।
मन मीत  देख  जगते  सपना।

जग जीत वीर  बनना  तुमको।
फिर  धीर  वीर बढ़ना  हमको।
जय बोल बोल अपनी जय हो।
जग जीत जीत अपनी तय हो।

नाम– बाबू लाल शर्मा 
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः

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