Advertisements

aashutosh kumar

भज ले कृष्ण कन्हैया
सबको तू ही नाच नचाया रे
हे गिरधर गोपाल
तान ऐसा तुने क्यों सुनाया रे ।

अपनी धुन में रमा ले मुझको
जनम सफल हो जयेगा
तेरे नाम की माला से
जग मे नाम कमायेगा
वो मुरली वाले
एक तेरा ही सहारा रे
भज ले कृष्ण कन्हैया
सबको तू ही नाच नचाया रे
हे गिरधर गोपाल
तान ऐसा तुने क्यो सुनाया रे ।

कंस का बध हो
या कौरवो का
सबके पीछे तुझको पाया रे
तेरी मधुर मुस्कान में
सारा जग समाया रे
भज ले कृष्ण कन्हैया
सबको तू ही नाच नचाया रे
हे गिरधर गोपाल
तान ऐसा तुने क्यो सुनाया रे ।

तुमसे ही ये सारा जग है
तेरी ही प्रकृति
तेरा गगन तेरा धरती
तेरी सूर्य तेरा चंद्रमा
फिर क्यू तेरी भक्ति में
अंधकार समाया रे
भज ले कृष्ण कन्हैया
सबको तू ही नाच नचाया रे
हे गिरधर गोपाल
तान ऐसा तुने क्यो सुनाया रे ।

“आशुतोष”

नाम।                   –  आशुतोष कुमार
साहित्यक उपनाम –  आशुतोष
जन्मतिथि             –  30/101973
वर्तमान पता          – 113/77बी  
                              शास्त्रीनगर 
                              पटना  23 बिहार                  
कार्यक्षेत्र               –  जाॅब
शिक्षा                   –  ऑनर्स अर्थशास्त्र
मोबाइलव्हाट्स एप – 9852842667
प्रकाशन                 – नगण्य
सम्मान।                – नगण्य
अन्य उलब्धि          – कभ्प्यूटर आपरेटर
                                टीवी टेक्नीशियन
लेखन का उद्द्श्य   – सामाजिक जागृति

(Visited 12 times, 1 visits today)
Please follow and like us:
0
http://matrubhashaa.com/wp-content/uploads/2018/10/aashutosh-kumar.pnghttp://matrubhashaa.com/wp-content/uploads/2018/10/aashutosh-kumar-150x150.pngmatruadminUncategorizedकाव्यभाषाashutosh,jhaभज ले कृष्ण कन्हैया सबको तू ही नाच नचाया रे हे गिरधर गोपाल तान ऐसा तुने क्यों सुनाया रे । अपनी धुन में रमा ले मुझको जनम सफल हो जयेगा तेरे नाम की माला से जग मे नाम कमायेगा वो मुरली वाले एक तेरा ही सहारा रे भज ले कृष्ण कन्हैया सबको तू ही नाच नचाया रे हे गिरधर गोपाल तान ऐसा...Vaicharik mahakumbh
Custom Text