दुर्लभ मानव देह जन, सुनते कहते बोल। मानवता हित ‘विज्ञ’ हो, जीवन है अनमोल।। . ✨✨✨ धरा जीव मय मात्र ग्रह, पढ़े यही भूगोल। सीख ‘विज्ञ’ विज्ञान लो, जीवन है अनमोल।। . ✨✨✨ मानव में क्षमता बहुत, हिय दृग देखो खोल। व्यर्थ ‘विज्ञ’ खोएँ नहीं, जीवन है अनमोल।। . ✨✨✨ […]

. प्रथम शतक . °°°°°°°° १. नीम का पेड़~ काग के घोंसलें में पिक के चूजे २. फाल्गुन संध्या~ बूँटे लिए बच्चे के पीछे कृषक ३. नदी का घाट~ भीड़ में वृद्ध ताके वस्त्र पोटली ४. जल की प्याऊ~ पोटली लिए पेड़ तले बुढ़िया ५. विवाहोत्सव~ चौपाल में वृद्ध के […]

कुण्डलियाँ (1) विषय- अविरल अविरल गंगा धार है, अविचल हिमगिरि शान! अविकल बहती नर्मदा, कल कल नद पहचान! कल कल नद पहचान, बहे अविरल सरिताएँ! चली पिया के पंथ, बनी नदियाँ बनिताएँ! शर्मा बाबू लाल, देख सागर जल हलचल! अब तो यातायात, बहे सडकों पर अविरल! . 👀👀👀 कुण्डलियाँ (2) […]

कुण्डलियाँ (1) विषय- अविरल अविरल गंगा धार है, अविचल हिमगिरि शान! अविकल बहती नर्मदा, कल कल नद पहचान! कल कल नद पहचान, बहे अविरल सरिताएँ! चली पिया के पंथ, बनी नदियाँ बनिताएँ! शर्मा बाबू लाल, देख सागर जल हलचल! अब तो यातायात, बहे सडकों पर अविरल! . 👀👀👀 कुण्डलियाँ (2) […]

. 🏉🏉 १ 🏉🏉 सर्दी का संकेत हैं, शरद पूर्णिमा चंद्र। कहें विदाई मेह को, फिर आना हे इन्द्र। फिर आना हे इंद्र, रबी का मौसम आया। बोएँ फसल किसान, खेत मानो हरषाया। शर्मा बाबू लाल, देख मौसम बेदर्दी। सहें ठंड की मार, जरूरत भी है सर्दी। . 🏉🏉 २ […]

सुनो ईश्वर यही विनती, यही अरमान परमात्मा। मनुजता भाव मुझ में हों, बनूँ मानव सुजन आत्मा। . ✨✨✨ रहूँ पथ सत्य पर चलता, सदा आतम उजाले हो। करूँ इंसान की सेवा, इरादे भी निराले हो। . ✨✨✨ गरीबों को सतत ऊँचा, उठाकर मान दे देना। यतीमों की करो रक्षा, भले […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।