आने का वादा था..

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charu shikha
आने का वादा था..
बच्चों को पढ़ाना था,
माँ के आँचल की
छाँव मे कुछ वक्त बिताना था….
पिता का एकमात्र सहारा था,
तो
पत्नी और परिवार संग
जीवन बिताना था।
हर रोज बच्चों से बात करता
था,
मै जल्द वापस आऊंगा
यही कहा करता था।
कुछ सो रहे थे
कुछ गुनगुना रहे थे
कुछ माँ के हाथ के बने
खाने का स्वाद याद कर रहे थे,
बच्चों के ख्याल से
चेहरे पर मुस्कान थी,
तो कही
अपनी ही शादी की बात थी
दोस्तों को निमंत्रण था
सबको शामिल होना था।
वक्त ने करवट बदली
एक पल मे
जिन्दगी बदली
वो वीर शहीद हो गए
मातृभूमि मे सब सो गए
जोर का धमाका था….
अगले ही पल सन्नाटा था।
खून की होली थी,
वो जाबाजों की टोली थी।
बिखर गए परिवार
हर तरफ था हाहाकार…..
#चारू शिखा
परिचय- 

नाम – चारु शिखा

शिक्षा – बी. ए. (लखनऊ विश्व विद्यालय )
प्रकाशन – अमर उजाला कॉम्पेक्ट ,डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट (लखनऊ )
-सुबह सवेरे डेली न्यूज़ पेपर (भोपाल ) एवं पत्रिकाओं में कविता,
-लघु कथा एवं लेखों का समय -समय पर प्रकाशन |

पुस्तक –  लघु कथा एवं काव्य संग्रह सम्मान – वुमन आवाज सम्मान एवं काव्य संपर्क सम्मान (जयपुर ,राजस्थान )पता –      उन्नाव, उत्तर प्रदेश

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।