भारत की आज़ादी के पहले ही एक क्रांति अपना अस्तित्व तलाश रही थी, उसी के माध्यम से भारतभर में एक सूत्रीय संपर्क स्थापित हो सकता था। संवाद और संपर्क के प्रथम कारक में हिंदी भाषा का अस्तित्व उभर कर आया। दशकों से हिन्दी भाषा के स्वाभिमान, स्थायित्व और जनभाषा के […]

दशकों से हिन्दी भाषा के स्वाभिमान, स्थायित्व और जनभाषा के तौर पर स्वीकार्यता का संघर्ष जारी है। उन्नीसवीं शताब्दी में भारत में भावनात्मक क्रांति का शंखनाद हो चुका था। उस समय भारत की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति अत्यन्त दयनीय हो चुकी थी। देश में होने वाले आन्दोलनों से जन-जीवन […]

जिंदगी में कई रिश्ते बनते हैं, हर रिश्ते का अलग है अहसास, कुछ खुशी के रिश्तें होते है तो, कुछ गम के होते है, कुछ रिश्ते मतलब के लिये बनते हैं, पर कुछ रिश्ते सबकुछ बन जाते हैं, सब रिश्तो का ही खेल है, हम हैं तो रिश्ते हैं, वरना […]

आने का वादा था.. बच्चों को पढ़ाना था, माँ के आँचल की छाँव मे कुछ वक्त बिताना था…. पिता का एकमात्र सहारा था, तो पत्नी और परिवार संग जीवन बिताना था। हर रोज बच्चों से बात करता था, मै जल्द वापस आऊंगा यही कहा करता था। कुछ सो रहे थे […]

पिता का कंधा अम्मा की गोदी सपनों मे परियों संग खेली…. रात मे चाँद-सितारों की टोली उनके संग लुकाछिपी खेली… चंदा संग मामा की बाते जुगनू बन रात मे घूमी बाबा-बाबा कहकर उनसे कंधे पर जा कर बैठी देखो खुला आकाश है ये संदर-सुंदर चाँद-सितारे आँखो मे सपना बन आते […]

चाय दिवस हर रोज होता है…. कभी मीठी कभी फीकी कभी अदरख, तुलसी कभी इलायची कभी सादी… इसका मेरे किचन मे बनना जरुर होता है, अपनों के साथ सोशल मीडिया पर बात एक प्याला चाय और बिस्कुट का साथ लाजवाब होता है। #चारू शिखा परिचय-  नाम – चारु शिखा शिक्षा […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।