इश़्क-ए-ज़िन्दगी

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puneet mishra

इस फ़रेबी दुनिया से बचना जरूरी हो गया है,
लग रहा है सूर्य-सा जलना जरूरी हो गया हैl

रात है ग़म से भरी और संग दौर-ए-ज़ाम है पर,
ऐसा लगता प्यार का मिलना जरूरी हो गया हैl 

कट रही है ज़िन्दगी भी अपनी कुछ तन्हाईयों में,
अब गिरूँगा इश्क में,गिरना ज़रूरी हो गया हैl 

इस क़मर की चाँदनी में दिख रही तस्वीर किसकी,
लग रहा है अब पता करना ज़रूरी हो गया हैl 

बाद और बादल भी देखो हैं नहीं ये होश में तो,
अब चलूँगा घर को मैं,चलना जरूरी हो गया हैl 

                                                                  #पुनीत मिश्र

परिचय: पुनीत मिश्र लेखन में उपनाम-मधुर का उपयोग करते हैंl आपकी जन्मतिथि-११ दिसंबर १९९८ व जन्मस्थान-गोला गोकर्णनाथ हैl बी.एस-सी. करने के बाद आपका  कार्यक्षेत्र-शिक्षा ही हैl आप उत्तर प्रदेश राज्य के शहर गोला गोकर्णनाथ(लखीमपुर खीरी) में ही रहते हैंl आप गीत,ग़ज़ल एवं मुक्तक रचने के अभ्यस्त हैंl कुछ पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं तो,अॉनलाइन कवि सम्मेलन में `काव्य भूषण` सम्मान मिला हैl आपके लेखन का उद्देश्य- शौक एवं हिन्दी भाषा को समाज में जागृत रखना हैl 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।