कायर पाकिस्तान 

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atul sharma
जियो और जीने दो का सिद्धांत,
जब रूद्ध हो जाए ,
दुश्मनी आवाम,
शांतिदूतों के विरुद्ध हो जाएं,
शांति और सुलह की हर राह,
जब अवरुद्ध हो जाए,
तो जन जन के मन से आवाज आती है,
शुरू,अब युद्ध हो जाए।
हम शांति का बीज रोपते,
तू आतंक की फसल उगा देता,
हम जीवन देने को पानी देते,
तू उसमें भी खून मिला देता,
कभी समझेगा,तू प्यार की भाषा,
इस आशा में,सबकुछ लुटाते रहे,
पीकर आसुओं के घूंट,हम तो,
सर सैनिकों के कटाते रहे ।
अभी मिराज का चखा है मजा,
तू नाराज मत होना,
बाकी है पिज्जा बर्गर सी जायकेदार डिश,
अभी हिम्मत मत खोना,
क्यों करता है पेट भरने का बहाना,
रसोई हमारी भरी हुई है,
सुन ले!तुझे नचाऐंगे डिस्को,
क्योंकि अभी तो पार्टी शुरू हुई है।
मुंह से जहर उगलने वाले,
कुछ अभी समझने तो दे,
आतंकी बगिया के माली,
चमन को कुछ उजड़ने तो दे,
शुरू की है वर्णमाला हमने तो अभी,
कहानी कुछ गढ़ने तो दे,
मांगता क्यों है प्राणों की भीख,
नक्शा जरा कुछ बदलने तो दे।

#अतुल कुमार शर्मा

परिचय:अतुल कुमार शर्मा की जन्मतिथि-१४ सितम्बर १९८२ और जन्म स्थान-सम्भल(उत्तरप्रदेश)हैl आपका वर्तमान निवास सम्भल शहर के शिवाजी चौक में हैl आपने ३ विषयों में एम.ए.(अंग्रेजी,शिक्षाशास्त्र,समाजशास्त्र)किया हैl साथ ही बी.एड.,विशिष्ट बी.टी.सी. और आई.जी.डी.की शिक्षा भी ली हैl निजी शाला(भवानीपुर) में आप प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत हैंl सामाजिक क्षेत्र में एक संस्था में कोषाध्यक्ष हैं।आपको कविता लिखने का शौक हैl कई पत्रिकाओं में आपकी कविताओं को स्थान दिया गया है। एक समाचार-पत्र द्वारा आपको सम्मानित भी किया गया है। उपलब्धि यही है कि,मासिक पत्रिकाओं में निरंतर लेखन प्रकाशित होता रहता हैl आपके लेखन का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को उजागर करना हैl

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।