फिल्म -बेगम जान(पूर्वावलोकन)

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बंगाली फिल्म ‘बाज़कहिनी’ का हिन्दी रीमेक है ‘बेगम जान’,जिसके संवादों ने ट्रेलर में ही तहलका मचा दिया है। यह फिल्म १४ अप्रैल को दर्शकों से रुबरु होगी। बँटवारा यानि एक काला अध्याय…राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजे जा चुके सुजीत मुखर्जी के निर्देशन में सजा एक बेहद दर्दीला विषय है,जिसने न केवल भारत के सीने पर लकीर खींची,वरन पाक के भी सीने को चाक किया है। ये विषय ही संगीन और रोचक है। सआदत हसन मंटो की लघुकथा टोबा टेकसिंह जिसमें इंडो-पाक बटवारे में पागलखाने के पागलों का बंटवारा बताया गया था,पर यह ध्यान दिलाती है। इसमें पागल टोबा को मरना मंज़ूर था, लेकिन बँटवारा नहीं,जो १९५५ में लिखा गया था और आज भी समसामायिक लगता है। इसका नाट्य रूपांतरण तब से लगातार होता आ रहा है। हाल ही में मेरे एक विद्यार्थी साथी गौरव साध ने भी इसे निर्देशित किया था। दोस्तों, एक घर का बँटवारा खून को खून से अलग कर देता है,तो ये तो मुल्क का बँटवारा है, जिसमें १.४५ करोड़ लोग शरणार्थी बने।
करोड़ों लोगों ने अपना घर,कारोबार, जमीन,जायदाद छोड़कर पलायन किया, जो धर्म के नाम पर हुआ था।
इसमें मानवता शोषित,पीड़ित होकर छटपटाई थी,रुह कंपा देने वाली और मानव जाति को शर्मिंदा कर देने वाली घिनौनी हरकत थी बँटवारा। महज कुछ हठधर्मी सियासतदानों की वजह से २० लाख लोगों की जान गई।विभाजन हिन्दुस्तान का काला अध्याय है,जिसका दर्द और घाव आज ७० साल बाद भी मेरे परिवार में ताज़ा बना हुआ है। बँटवारे पर कुछ ख़ास किताबें,फ़िल्में,धारावाहिक
यशपाल की ‘झूठा सच’,भीष्म साहनी का ‘तमस’,अमृता प्रीतम की ‘पिंजर’
‘ट्रैन टू पाकिस्तान’,’मिडनाइट चिल्ड्रन्स’,’गरम हवा’,’अर्थ’और ‘हे राम’ है। ‘बेगम जान’ भी इसी कड़ी की फिल्म है। इसे देखकर अब लगा कि, महेश भट्ट और विशेष फिल्म्स अपडेट होकर आए हैं। इसमें विद्या बालन,नसीरुद्दीन शाह,आशीष विद्यार्थी,रजत कपूर,इला अरुण और गौहर खान ने अभिनय किया है।

                                                                       #इदरीस खत्री

परिचय : इदरीस खत्री इंदौर के अभिनय जगत में 1993 से सतत रंगकर्म में सक्रिय हैं इसलिए किसी परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग 130 नाटक और 1000 से ज्यादा शो में काम किया है। 11 बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में लगभग 35 कार्यशालाएं,10 लघु फिल्म और 3 हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। इंदौर में ही रहकर अभिनय प्रशिक्षण देते हैं। 10 साल से नेपथ्य नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं।

 

 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।