लो चला देखो ये साल चला

0 0
Read Time2 Minute, 22 Second

ajay ahsas

लो चला देखो ये साल चला, अठरह को लेके काल चला।

आने वाला जो उन्निस है, वो बीसो सपने पाल चला।।
रूखसत कर दो अब दिसम्बर को, दुख दिल के, अॉसू के अम्बर को
नवबर्ष मे नव अभियान करो, पा लो खुशियों के समन्दर को।
बोरी बिस्तर ये बांध चला,लो चला देखो ये साल चला।
कुछ अॉख से अॉसू टपके थे, कुछ शत्रु जो हम पर लपके थे
कुछ उहापोह की उलझन थी, और खुद में सम्हलने की ठन थी।
दे करके सबको मात चला, लो चला देखो ये साल चला।
थककर रस्ते में रूके कभी, छोटों के आगे झुके कभी
भागे दौड़े घुटनों के बल, फिर भी मन बना रहा चंचल
ठंडी में ओढ़़े साल चला,लो चला देखो ये साल चला।
जो पल देखे वो अच्छे थे, जो लोग मिले वो सच्चे थे
हम ही थोड़े से कच्चे थे, बाकी सब हमसे अच्छे थे
सुख दुख के गुच्छे बांध चला, लो चला देखो ये साल चला।
कुछ लोग खफा हो जाते थे, कुछ लोग रुलाकर जाते थे
दिल तोड़ दिया कुछ लोगों ने, कुछ लोग हमें तड़पाते थे
सबसे कर दो दो हाथ चला, लो चला देखो ये साल चला।
सांसों में उसके सांस हुआ, और आज हमें एहसास हुआ
कोई अरसे बाद हमें चाहने लगा, बातों पे मेरी मुस्काने लगा
दे थप्पी मेरे गाल चला, लो चला देखो ये साल चला।
तुम साथ अगर दो ऐ यारों! तुम को “एहसास” दिलायेंगे
नवबर्ष ज्योति बन जीवन में, जीवनभर साथ निभायेंगे
मेरा हाथ ले अपने हाथ चला, लो चला देखो ये साल चला।।

#अजय एहसास

परिचय : देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के सुलेमपुर परसावां (जिला आम्बेडकर नगर) में अजय एहसास रहते हैं। आपका कार्यस्थल आम्बेडकर नगर ही है। निजी विद्यालय में शिक्षण कार्य के साथ हिन्दी भाषा के विकास एवं हिन्दी साहित्य के प्रति आप समर्पित हैं।

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

मेरी उदासियों की सुखी दरारें

Tue Jan 8 , 2019
आओ तुम्हें तुम्हारे वादों में सूखी दरारें दिखाती हूँ .. वादे तुम करके भूलते हो. और उदास मैं हो जाती हूँ .. कब कहती हूँ.की तोड़ लाओ सितारे आसमान से .. मैं तो खुद सितारे टूटने के इंतज़ार में आंगन में सो जाती हूँ तुमसे तुम्हारा थोड़ा वक़्त मांगती हूँ […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।