ख्याल दिल में तेरा

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shivesh agrawal

ख्याल दिल में तेरा आया न होता
नैन  जो  तुझसे  लड़ाया न होता

कहना चाहती थी तुझसे मेरी आँखे
कह जाती तो ख़त आया न होता

जिगर में तेरे मैं तेरा बन के रहता
जो किया तूने मुझको पराया न होता

जलाए चराग़ मैंने तेरे दिल में
जलते गर तूने बुझाया न होता

नही ख़लूक देता तेरे दिल का कोना
जो गुल उसमे मैंने खिलाया न होता

सोगवार न होता कभी मेरा ये दिल
जो संग तेरे सपना सजाया न होता

ये  हयात तेरी हसीन होती नन्हा
जो दिल उसने तेरा दुःखाया न होता

#शिवेश अग्रवाल ”नन्हाकवि”

परिचय

नाम – शिवेश अग्रवाल

साहित्यिक उपनाम – नन्हाकवि

वर्तमान पता –  खिरकिया जिला हरदा 

राज्य – मध्यप्रदेश

शहर -खिरकिया हरदा

शिक्षा – बी.कॉम प्रथम वर्ष

विधा – ग़ज़ल  नज़्म

प्रकाशन – उड़ान (ग़ज़ल साँझा संग्रह 2017, एक रोटी मासिक पत्रिका (ओम्कारेश्वर), नागरिक वाणी (झारखण्ड), जय विजय नवी मुंबई (ई पत्रिका), वर्तमान दैनिक अंकुर अख़बार (नोएडा), नगर कथा साप्ताहिक अख़बार (इटारसी), नव्या ई पत्रिका व सोशल मीडिया पर विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचना प्रकाशन।

लेखन का उद्देश्य – अंधकारमयी जीवन में प्रकाश लाना अपने लेखन से देश दुनिया में जनमानस तक सन्देश प्रेषित करना व भटको को सही राह दिखाना ।

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।