*वतन*

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babulal sharma

वतन, बस  भू मण्डल  के कुछ,
एक हिस्से  का  ही नाम नहीं है।
वतन,  सीमा रेखा में शासन का,
और  सरकारों का काम नहीं है।👌

वतन, इंसानों की आबाद बस्तियों,
का रहने बसने का ही धाम नहीं है।
वतन, प्रभुसत्ता धारी संविधान का,
केवल कोरा शुभ गुण गान नहीं है।👌

देश, राष्ट्र और राज्य से, ऊपर जो,
प्राण दुलारा “हिन्दुस्तान”:-वतन है।
भारत माँ का युगों युगों का संचित,
निज संतति हित अरमान वतन है।👌

महा हिमालय  से बहती , वे गंगा,
यमुना की पावन श्रम धार रतन है।
सवा अरब  की  राष्ट्र चेतना वाली,
चेतन जनज्वाला का नाम वतन है।👌

सागर चरण  पखारे,वंदन करने को,
जगत गुरु भारत का  नाम वतन है।
*प्राण जाय पर वचन न जाई* उस,
सौगाती परिपाटी का नाम  वतन है।👌

विभिन्नता में एका हो पग पग पर,
ये पुण्य संस्कृति का नाम वतन है।
सब का  कल्याण चाहने वाले मनु,
वैदिक  सनातनी  संस्कार वतन है।👌

“वसुधैवकुटुम्बकम” के नाद करे,
अपनी वह  पावन सोच वतन है।
“मेरे, देश की धरती सोना उगले”,
अफसाने, गाने का मान वतन है।👌

“जहांडालडालपरसोनेकीचिड़िया”
“करतीहैबसेरा” गाने वाले ‘मन’ है।
यह सोने  की  चिड़िया  कहलाता,
महावीर व गौतम का देश वतन है।👌

“ऐ मेरे  वतन के लोगों,”,,, गाने,
बनने  वालों  का  वास वतन है।
“दूध  दही की नदियाँ  बहती”वो
जय किसान का  खास वतन है।👌

जन गण मन और  वंदेमातरम,
संग भारत माता का जयकारा।
अमर  तिरंगा  प्राणों  से प्यारा,
वही अरमान–ऐ–वतन हमारा।👌

‘दिल दिया है जान् भी देंगे’ कहकर,
अरमान-ए– तिरंगे  करे  जतन  है।
“अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों”
कहने  वाली, निभती  रीत वतन है।👌

सब रिश्तों,भाषा, धर्मो से ऊपर,
यह  प्यारा अलफाज   वतन  है।
निज , जान  मान  सम्मान शान,
सबसे ऊँची एक,  सोच वतन है।👌

गोली,फाँसी और कालेपानी संग,
इंकलाब   जय हिन्द    जतन  है।
देश  के  खातिर  कटा  लिए सिर,
आजादी के वीरों के नाम वतन है।👌

पन्ना, पद्ममिन , कर्मवती, मीरा,
और, झाँसी  की वह महा रानी।
तुलसी,सूर, रसखान,व कबीरा,
गूंजे रैदास गुरुनानक की वानी।👌

यही वतन है मेरा तुम्हारा,अपना,
सबका पूज्य प्राण हमारा सपना।
इसके खातिर  जिऐ मरेंं हम सब,
जयहिन्द व वन्देमातरम्  जपना।👌

यह वतन है अपने जय जवान का,
तिरंगा   जिनके  कफन  कमाई है।
माँ के खत  पढ़, शान ..से ….गाते,
“वतन….की…..चिट्ठी….आई…है”।👌

सम्राट  भरत  चाणक्य  शिवाजी,
राणाप्रताप,गुरुसिखपंथ रतन है।
भगत सिंह,शेखर,बिस्मिल,गाँधी,
वीर- सपूत, प्रसूता धरा  वतन है।👌

यहाँ कदम कदम माँ,भूमि जन्में,
लाल, हीरे मोती खनिज रतन है।
श्री राम, कृष्ण के आदर्शों वाला,
मेरा  प्यारा  भारत  वर्ष वतन है।👌

मंदिर,मस्जिद, गुरु द्वारों,गिरिजों,
का यह पावन शुभ धाम वतन है।
पंचशील विश्वशांति आतंकपतन,
की चाहतवाला भारतवर्ष वतन है।👌

नाम- बाबू लाल शर्मा
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः

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