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सहरा हो या समुंदर
दोनों की क़िस्मत में तन्हाई है
तन्हा मैं भी हूँ
तन्हा तन्हाई है।
बज़्म में अकेला
गोशे में तन्हाई है
निगाहें भी सूनी
उमंगों में थकान छाई है।
दिल है रूठा
फ़रियाद करूँ किससे
अल्लाह ने भी दी
मेरे ताले तन्हाई है।
#डॉ रूपेश जैन ‘राहत’
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