श्रृंखला

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pramod kumar

अपने मन के भावों को,

उद्वेग से उठते बहावों को

मै आज समेट कर  हार पिरोना चाहता  हूँ

हाँ मै आज कुछ  लिखना चाहता हूँ

मेरे अन्दर  मची हुई है जो हलचल,

व्याकुल, व्यथा  बाहर आने को रही है मचल,

ना ही अपने विचारों का

खुला  दरबार लगाना चाहता हूँ

हाँ, मै आज कुछ  लिखना चाहता हूँ

चाह नहीं मुझे किसी भी सम्मान की

पर परवाह है मुझे अपने मान की

शान बन पाऊं  किसी अख़बार के पनो में  ना सही

बस मन को शांत कराना चाहता हूँ

हाँ, मै आज कुछ  लिखना चाहता हूँ

न शौक है मुझे किसी से तुलना  हो मेरी

बस खुशियों से भरी जिंदगी हो मेरी

इन खुशियों को अपनों के नाम कराना  चाहता हूँ

हाँ, मै आज कुछ  लिखना चाहता हूँ

मै क्या हूँ, कौन हूँ,जानता हूँ अच्छी तरह,

फिर क्यों लोग मुझे देखते है नए कवि की तरह,

“हर्ष” अपने भावो से एक पहचान बनाना चाहता हूँ,

हाँ ,मै आज कुछ  लिखना चाहता हूँ.

#प्रमोद कुमार “हर्ष”

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।