जीवन के रंग मे खुशियों के संग मे , सुबह की लाली, घटा शाम की तन्हाई मे , हरे-भरे पेड़ों पर ,चिड़िया चहकती रहें , खेत-खलिहानों में,फसल लहलहाती रहे , नयी रोशनी में , नये जीवन की शुरुआत हो , सबको जीने की नई दिशा, नयी राह मिले। गाँव मे […]

तुम्हारा मुझे एक टक निहारना मुझें बहुत याद आता है , तुम्हारा दुपट्टे में मुँह छिपा कर मुस्कुराना , मुझें बहुत याद आता है , नित्य नये-नये खत लिख कर देना , मुझें बहुत याद आता है , ऊपर से गुस्सा होना और भीतर ही भीतर मुझें दिल से मानना […]

आया जी आया रक्षा बंधन का त्यौहार , भाई – बहनों का का प्यार का त्यौहार , जीवन के जन्मों-जन्मों का साथ देती , बहना भाई के जीवन को रक्षा करती , संसार के हर दुखों से भाई की भलाई करती , जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन की रक्षा […]

मौत से लड़ना क्या , मौत तो एक बहाना है, जिन्दगी के पन्नों में, कब क्या हो जाए, ये न तो मै जानता न तुम, उल्फत न मिलती , जिवन के रुसवाईयो मे, हर जहा हमे पता होता , जिवन के रह्नुमाईयो मे, मौत से मुड़ना क्या, आरजू , गुस्त्जू […]

वो बचपन की य़ादे फिर याद आयी , ज़हाँ चीड़ीयो की की चहचाहात रही चांदनी , खेतो मे खिलखिलाती रही रोशनी , भँवरो मे मुस्कुराहट भरी है , वो बचपन की य़ादे फिर याद आयी ! सूर्य की किरणे चमकता ही रहता है , पेड़ो मे फल लदा ही रहता […]

माता आओ मेरे अंगना माता मेरी बुला रही है। मेरी माता जगजननी को मैया कहके झूला रही है। मां में देखूं स्वरूप तुम्हारा बहन में ममता पाई है हर नारी में जगदम्बा की मूरत एक समाई है। घूम रहे हैं महिषासुर चौकों में बाज़ारों में मानवता को तार करते जिल्लत […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।