बिंदी है श्रृंगार जिसका*

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atul sharma

हिंदी मेरी शान है, मान है,
पहचान है,
हर हिन्दुस्तानी हो हिंदी भाषी, मेरा यह अरमान है।
इस धरा का कण कण बोले,
मेरी प्यारी भाषा को,
अखिल विश्व में मान पाए यह,पंख लगे इस आशा को।
अमृत पान किया मानो,हिंदी ने पाई अमरता है,
करता प्रेम हिंदी से जो,सूर्य समान चमकता है।
हिंदी प्रेमी तारे सितारे,मर कर अमर हो गए जो।
मातृभाषा की सेवा से,गगन छू गए सेवक वो।
उदाहरण कुछ सूर,तुलसी,बिहारी और मीरा का,
कबीर,जायसी,दिनकर और भूषण जैसे हीरा का।
हिंदी की सेवा में जीवन अर्पित कर गए जो,
पाया यश और मान इन्होंने, साहित्य समर्पित कर गए वो।
कंठ में धारै,जो इस भाषा को, पाएं मान वह हिंदी से,
ज्यों मान बढ़ाएं सधवा का,
भाल सजै ज्यों बिंदी से।
सरलता,सरसता है श्रृंगार,
सादगी जिसका ताज है,
रस अलंकार आभूषण प्यारे,
मधुर वाणी जिसका राज है।
ऐसी प्यारी हिंदी को गर,
मान न हम दे पाएंगे,
तो विश्व में अपने आप को,
खुद ही ढूंढते रह जाएंगे।

#अतुल कुमार शर्मा

परिचय:अतुल कुमार शर्मा की जन्मतिथि-१४ सितम्बर १९८२ और जन्म स्थान-सम्भल(उत्तरप्रदेश)हैl आपका वर्तमान निवास सम्भल शहर के शिवाजी चौक में हैl आपने ३ विषयों में एम.ए.(अंग्रेजी,शिक्षाशास्त्र,समाजशास्त्र)किया हैl साथ ही बी.एड.,विशिष्ट बी.टी.सी. और आई.जी.डी.की शिक्षा भी ली हैl निजी शाला(भवानीपुर) में आप प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत हैंl सामाजिक क्षेत्र में एक संस्था में कोषाध्यक्ष हैं।आपको कविता लिखने का शौक हैl कई पत्रिकाओं में आपकी कविताओं को स्थान दिया गया है। एक समाचार-पत्र द्वारा आपको सम्मानित भी किया गया है। उपलब्धि यही है कि,मासिक पत्रिकाओं में निरंतर लेखन प्रकाशित होता रहता हैl आपके लेखन का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को उजागर करना हैl

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