एक गीत लिखा है मैंने

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vivek kvishwar
एक गीत लिखा है मैंने 
जो कल हो जायेगा इतिहास,
गाना है तो आज ही इसे 
अपने स्वर में गा डालो।
 
धुन भी तुम्हे बनानी है 
और वाद्य तुम्हे ही हैं चुनने,
आरोह और अवरोह सभी 
इसमें तुमको ही हैं बुनने।
 
मेरे शब्दों पर फिर चाहे तुम
ज्वाल धरो या बर्फ़ रखो,
आक्रोश मेरा उनमे सुलगा है 
उनमे रंग भरो या श्वेत रखो।
 
मैं नहीं जानता; और क्यों जानूं 
किस-किसको छूए मेरी बात,
दायित्व तुम्हे मैं सौंप रहा 
ना हो इसके भावों से घात।
अधरों से तुम इसे छुआ दो 
फिर बादल से जा बांधो,
दिशा-दिशा फिर गूँज उठेगी 
जो इसको मन से साधो।
 
.नाम: विवेक कवीश्वर 
नयी दिल्ली
सम्मान:
प्रकाशन: 1 काव्य-संकलन
1 ग़ज़ल और नज़्म संकलन
1 दोहा और हाइकु संकलन
1 नाटक / फिल्म स्क्रिप्ट
8 काव्य के साझा संकलन
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।