एक सवाल !

madhu pandey
मां की मै नाजों की पाली,
 मै पापा  की   लाडली..
उड़ना  चाहूं  दूर   गगन
छूना   चाहूं   आसमान
चाहूं हिरनी सी भरूं कुलांचे,
कभी   मोरनी   चाल    चलूं..
कभी  तितलियों संग भागुं मैं,
फूलों  संग कभी सवाल करूं..
पूछूं  क्यों  खिलते  हो तुम,
जब  अगले  दिन  मुरझाते,
 अपनी   सुन्दरता    खोकर
हासिल  तुम कर  क्या पाते..
पंछि  से  मांगू मै उनके”पर”
उनसे  पूछूं  एक  सवाल,
तुम  ऐसे  कैसे उड़ती हो,
मां घर से देती है, निकाल?
मेरी  मां क्यों  इतना डरती,
जैसे पिंजरे में मुझको रखती..
घर से बाहर न निकलने देती,
न जाओ बिटिया ये क्यों कहती..
कहती  कोई  बाज मिले ना,
तुझ पर  उसकी नज़र टिके ना,
देख अकेली  झपट    पड़े ना,
गिद्ध  नज़र वो डपट पड़े ना..
तुम्ही  बताओ  मेरा  बचपन,
क्या  फिर  लौट  के आएगा..
बचपन  डर  कर यूं  बिते तब,
होकर   युवा         डराएगा..
सुनो  बताओ, इन बाजों से,
डर तुम्हे नहीं क्योंकर लगता,
जबकि गगन विशाल में विचरण,
 करती   रहती हो   तुम  सदा..
अपने”पर” ही दे दो मुझे तुम,
मै भी  तुम्हारे    संग उडूं..
या  धरती के  हर बाजों का,
मै एक  दिन, खातमा करूं..✍🏻
#मधु पांडेय
परिचय:

नाम  – मधु पांडेय 
साहित्यिक उपनाम – मृदुला 
जन्मतिथि –  17 मई 19- 80
वर्तमान पता – अनिल नगर, चितई पुर वाराणसी 
शिक्षा – ग्रेजुएट इतिहास ऑनर्स 
कार्य क्षेत्र -हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत
विधा – श्रृंगार रस,प्राकृतिक सौंदर्य, सामाजिक भ्रष्टाचार
अन्य उपलब्धियां- संगीत क्षेत्र में कई

matruadmin

Next Post

क्यूं ना जाति का काॅलम हटा दिया जाये

Wed Aug 15 , 2018
आरक्षण नाम तो सबने सुना ही होगा एक शब्द छोटा सा है। जो कि दलितों को आगे बढ़ाने में बहुत ही सहायक हैं। आरक्षण किसी का भी पुश्तैनी हक नही है और ना ही विरासत है!     अब सवाल ये उठता है कि आरक्षण का क्या सदुपयोग हो रहा […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।