“मुखिया जी को बुलाओ पहले…” एक सेवादार चिल्लाया “इसमें मुखिया जी का क्या काम है?” दूसरे ने तरमीम किया। “वसीयत से लेकर संदूक की चाभी तक सब तो उनके पास ही है उनके बिना आखिर करोगे क्या?” पहले ने अपने छठवीं ज्ञानेन्द्री पर जोर डालते हुए दूसरे को बिस्वास में […]

तुझको तेरा हाल मुबारक मुझको मेरा हाल मुबारक तुझको तेरा पिज्जा बर्गर मुझको रोटी दाल मुबारक तेरे हर सपने तूफानी मेरी लंगड़ी चाल मुबारक तुझको चाकू बल्लम भाले घोड़े को बस नाल मुबारक तुझको तेरे झूठे दाने आखेटक को जाल मुबारक # दिवाकर पांडेय ‘चित्रगुप्त’  Post Views: 208

जब कभी मेरी  मांँ का  आंँचल मेरे सर पर आए , दुनिया की मजाल क्या ईश्वर भी न कुछ कर पाए, मांँ  के  चरणों  में  स्वर्ग  संग  चार  धाम  बसे  हैं- छू  माँ  के चरणों को मिट्टी पावन चंदन बन जाए। नाम-प्रज्ञा पाण्डेय साहित्यिक उपनाम-प्रज्ञा पाण्डेय वर्तमान पता-उन्नाव, उत्तर प्रदेश […]

           *कलाधर छंद* श्वेत  वस्त्र  धारिणी  सुहंस  पै  रही  सवार, मातु   ज्ञान   दान   दे   सुचेतना  उभार  दे| अंधकार  हार  के  हरो  सभी  हिये   विकार, दिप्त   शुभ्र   विश्व   में   सुलोचना   पसार  दे|| तत्व  ब्रह्म  वेद  की  समस्त  ज्ञान  धारिणी  तु, लेखनी   मयूर   पंख   छंद   बंध   सार  दे| […]

पिंकी के फोन की घंटी बजती है पिंकी “हेलो कौन” उधर से आवाज आती है “मैं रेनू कैसी हो पिंकी” पिंकी खुशी से झूम उठती है “अरे रेनू तुम कहाँ हो? तुम्हारा नंबर भी नहीं लगता,शादी के बाद से तो तुम्हारी कोई खबर ही नहीं है। भूल गई क्या अपनी […]

वास्तु शास्त्र और फेंगशुई को लोग एक समान समझने की गलती कर रहे हैं। जिसके कारण लोग वास्तु शास्त्र की अपेक्षा फेंगशुई में बताई गई वस्तुओं का अधिक उपयोग करने लगे हैं। बाजारों में दुकाने फेंगशुई की सामान से भरी पड़ी है।और लोग बिना समझे उसका अत्यधिक उपयोग करते जा […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।