सबसे बड़े अभिनेता को सबसे बड़ा पुरस्कार

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अपने देश में दादा साहब फाल्के अवार्ड अभिनय के क्षेत्र में दिया जाने वाला सबसे बड़ा पुरस्कार है जिसे देश के सबसे बड़े अभिनेता को दिये जाने की खबर सुनकर हर किसी को एक सुखद अनुभूति हो रही है।

चार दशक से भारतीय सिनेमा का अहम हिस्सा रहे अमिताभ बच्चन को यह अवार्ड प्रदान किये जाने की घोषणा ने असंख्य लोगों को आनन्दित और गौरवान्वित किया है।

कोई सदी का महानायक ऐसे ही नहीं बनता। असफलताओं के बीच सफलता की राह तलाशना, जीवन के संघर्षों से सीखना और हर संघर्ष के साथ खुद को निखारने का नाम है अमिताभ बच्चन। जिस उम्र में लोग काम से अवकाश ले लेते हैं वे लीक से हट कर अपने नये नये किरदारों पर प्रयोग करते नजर आते हैं।

दुनिया में बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो अपने जीवन काल में ही मिथ बन जाते हैं। फीनिक्स पक्षी की तरह हर बार फिर से खड़े होने की उनकी जिजीविषा ऐसा ही एक मिथ गढ़ती है।

अपने व्यक्तित्व, अभिनय कौशल और व्यवहार कुशलता की बदौलत वे पुरानी पीढ़ी से लेकर आज की पीढ़ी के दिलों में बसते हैं। ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के जरिये घर घर में हिंदी भाषा की मिठास को पहुँचाने का काम भी उन्होंने बड़ी ही खूबसूरती के साथ किया है। फिल्म और टीवी के माध्यम से हिंदी के संवर्धन की दिशा में उनके योगदान को भी देश याद रखेगा। अंग्रेजी भाषा को अपनी संस्कृति समझने वाला आज का आभिजात्य वर्ग भी उनकी स्तरीय हिंदी भाषा शैली का मुरीद है।

मेरे लिए यह अवसर महानायक को बधाई देने के साथ साथ उनके पूज्य पिताजी एवं खुद उनके साथ जुड़े कुछ संदर्भों को याद करने का भी है…

80 के दशक में पूज्य डा. हरिवंशराय बच्चन जी के साथ मेरा लगातार संपर्क बना हुआ था। उनके मार्गदर्शन में मेरी चार किताबें प्रकाशित हो चुकी थीं। साहित्यिक विचारों के आदान प्रदान के साथ परिवार का कुशल क्षेम भी होने लगा था। अमिताभ जी की बीमारी, अमेरिका में चल रहे उनके इलाज, स्वास्थ्य में हो रहे सुधार आदि बातें भी वो मेरे साथ साझा करने लगे थे। उनके द्वारा प्रेषित 38 पत्रों में से कई पत्रों में अमिताभ जी और उनके स्वास्थ्य का जिक्र आता है।

1983 में ‘कुली’ फिल्म की शूटिंग के दौरान जब उन्हें चोट लगी और वे इलाज के लिए अमेरिका गए…उस दौरान लिखे गए पूज्य डा. बच्चन के पत्रों में बेटे के स्वास्थ्य की चिंता और एक पिता की मनोदशा को स्पष्ट रूप से देखा समझा जा सकता है।

21 4 84 को प्रेषित पत्र में वे लिखते हैं…सम्मान बंधु, पत्र के लिए धन्यवाद…स्वास्थ्य अनुकूल नहीं…आपकी कृति नहीं देख सका…परीक्षा में सफलता के लिए शुभकामनाएं…अमिताभ जी की ओर से भी सद्भावना के लिए आभार प्रकाश…अपनी साधना से आगे बढ़ें… ऊपर उठें…सादर… बच्चन

15 8 84 को लिखते हैं…अमिताभ जी के प्रति चिंता के लिए आभारी हूँ…उनका इलाज अब भी अमरीका में हो रहा है…

26 12 84 को लिखते हैं…अमिताभ जी के प्रति आशापूर्ण सद्भावना के लिए धन्यवाद…

इस कड़ी में स्वयं अमिताभ बच्चन जी का एक पत्र भी स्मरण में आता है जिसे उन्होंने फरवरी 2008 में माता तेजी बच्चन जी के निधन पर मेरे द्वारा प्रेषित पत्र के जवाब के तौर पर भेजा था।
अमिताभ जी लिखते हैं…

My dear Dr. Swayambhu,
The warmth of your kind expression of sympathy and shared grief at passing away my beloved mother is truly comforting. Thank you for your care and concern.
The void of her absence is tremendous. Your consoling words are a great solace to our grief and we are grateful.
Warmly.
Amitabh Bachchan.

1984 में जब जुहू मुंबई स्थित उनके निवास ‘प्रतीक्षा’ में पूज्य हरिवंशराय बच्चन जी के साथ मुझे मुलाकात का सौभाग्य प्राप्त हुआ उस दौरान अमिताभ जी अपनी शूटिंग के सिलसिले में देश से बाहर थे।

        बहरहाल वे देश विदेश में करोड़ों लोगों के प्रेरणा स्रोत हैं और हमेशा ही सर्वोच्च सम्मान के अधिकारी हैं। ईश्वर की कृपा उन पर एवं उनके पूरे परिवार पर सदैव बनी रहे।

हार्दिक बधाई…अमित शुभकामनाएं…शत शत अभिनंदन !

#डॉ. स्वयंभू शलभ

परिचय : डॉ. स्वयंभू शलभ का निवास बिहार राज्य के रक्सौल शहर में हैl आपकी जन्मतिथि-२ नवम्बर १९६३ तथा जन्म स्थान-रक्सौल (बिहार)है l शिक्षा एमएससी(फिजिक्स) तथा पीएच-डी. है l कार्यक्षेत्र-प्राध्यापक (भौतिक विज्ञान) हैं l शहर-रक्सौल राज्य-बिहार है l सामाजिक क्षेत्र में भारत नेपाल के इस सीमा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए कई मुद्दे सरकार के सामने रखे,जिन पर प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री कार्यालय सहित विभिन्न मंत्रालयों ने संज्ञान लिया,संबंधित विभागों ने आवश्यक कदम उठाए हैं। आपकी विधा-कविता,गीत,ग़ज़ल,कहानी,लेख और संस्मरण है। ब्लॉग पर भी सक्रिय हैं l ‘प्राणों के साज पर’, ‘अंतर्बोध’, ‘श्रृंखला के खंड’ (कविता संग्रह) एवं ‘अनुभूति दंश’ (गजल संग्रह) प्रकाशित तथा ‘डॉ.हरिवंशराय बच्चन के 38 पत्र डॉ. शलभ के नाम’ (पत्र संग्रह) एवं ‘कोई एक आशियां’ (कहानी संग्रह) प्रकाशनाधीन हैं l कुछ पत्रिकाओं का संपादन भी किया है l भूटान में अखिल भारतीय ब्याहुत महासभा के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विज्ञान और साहित्य की उपलब्धियों के लिए सम्मानित किए गए हैं। वार्षिक पत्रिका के प्रधान संपादक के रूप में उत्कृष्ट सेवा कार्य के लिए दिसम्बर में जगतगुरु वामाचार्य‘पीठाधीश पुरस्कार’ और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए अखिल भारतीय वियाहुत कलवार महासभा द्वारा भी सम्मानित किए गए हैं तो नेपाल में दीर्घ सेवा पदक से भी सम्मानित हुए हैं l साहित्य के प्रभाव से सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-जीवन का अध्ययन है। यह जिंदगी के दर्द,कड़वाहट और विषमताओं को समझने के साथ प्रेम,सौंदर्य और संवेदना है वहां तक पहुंचने का एक जरिया है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।