*सावन*

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babulal sharma

सावन आवन कह गये,धनके लोभ विदेश।
प्रीत रीत भूले  सभी , तन मन रहे  कलेश।
तन मन रहे कलेश, रात दिन नींद न आवे।
लग जाए कहिँ  नैन , रैन  में सपन सतावे।
“लाल” पपीहा मोर,शब्द दादुर मन भावन।
प्यासी चातक देख, निहारूँ आवन सावन।

.        2. 🌾 *पावस*.🌾
पावस  सावन मास मे , शिव जी के उपवास।
सखी सहेली मिल करे,साजन नित उपहास।
साजन नित उपहास, पिया परदेश बसत हैं।
नई  नई  नित नार , राह  भर  तंज कसत  है।
कहे लाल कविराय,बिजुरिया तन सुलगावन।
नित बरसे ये नयन ,झड़ी ज्यों पावस सावन।

.          3. 🌴 *बिरखा*🌴
बरसे  बिरखा सावनी,फसल  सजे संगीत।
दादुर पपिहा  मोर अहि,खोजे अपने मीत।
खोजे  अपने  मीत, नचत गावत वन डोले।
शिव पूजा नर नार , हरे  हर बम बम बोले।
कहे लाल कविराय,चुनर धानी  जो  सरसे।
शिव से है अरदास ,नित्य ही बिरखा बरसे।

.       4.  🌼 *सावन वर्षा*🌼
बरसा सावन रात भर , उफने बंध तलाव।
खेत लबालब हो  रहे,नदियाँ चलती  नाव।
नदियां  चलती  नाव , राग मल्हारें  गावत।
कागज की  है नाव, बालपन नीर बहावत।
कहे लाल सुन बाल,खेलकर के मन हरषा।
नेह स्नेह व दुलार , प्रीत कर सावन बरसा।

.        5. 🌵 *विरह बधूटी*🌵
विरह  बधूटी सावनी ,रूठे मत हर बार।
बार बार बेरुखि करे, टूट जाय घर बार।
टूट  जाय  घर  बार , कई  ईमान  हारते।
शेष  महेश  सुरेश, नहीं  विश्वास  धारते।
कहे’लाल’कविराय,आस खुशहाली टूटी।
बचा रहे निज मान ,पावनी विरह बधूटी।

नाम- बाबू लाल शर्मा 
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।