थकन

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punam katariyar

थके- हारे से हैं ये दिन,
बड़े हताशे से हैं ये दिन.
 भोर की स्फू्र्ति भी, उनींदी-सी है,
 निढाल -रातें भी, सो नहीं पातीं है.
बुझी आंखें सपनों से नहीं सजते,
खुली आंखों की दिनचर्याएं बोझिल- सी.
जाने कहां गए,
वो भोर का मुलायम- रेशम -चेहरा,
ओस से भीगीं वो सिहरन भरी रातें.
कहां खो गए ,
वो,अल्हड़ -मन की प्रेम -पाती.
वो, चौपालें, वो संगी साथी.
  बैल बन गया कोल्हू का,
  चलते ही रहता हूं,
 निरंतर,आगे बढ़ते ही रहता हूं.
लौटकर वहीं, फिर स्वयं को वहीं पाता हूं.
जोश कहां,
क्लांत से  पूरित है ये मन.
तनाव से मुक्त अब कहां जीवन?
‘मेहनतकश’ की परिभाषा अब नवीन गढ़ों,
‘इन्सान’  नहीं,  हमें  ‘मशीन’   कहो।
#पूनम( कतरियार)
नाम-   पूनम (कतरियार)
जन्म-स्थान :हजारीबाग(झारखंड)
शिक्षा–   एम.ए.(हिन्दी साहित्य)
संप्रति  –  लेखन
पता   –   पटना(बिहार)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।