जीवन का क्या भरोसा

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kishor saklani
चंद दिनों का ये जीवन है,खुद पर इतना गुरुर न कर,
बैर भाव न रख तू मन में,खुद को सबसे दूर न कर ll
जग में खाली हाथ तू आया,खाली हाथ ही जाएगा,
न कुछ तेरा न कुछ मेरा,यहीं  सब कुछ रह जाएगा l
मीठे-मीठे बोल से तेरे,दिल सबका खुश हो जाएगा,
प्यार भरा सुकून मिलेगा,दिल से नफरत तू दूर तो कर ll
चंद दिनों का ये जीवन है,खुद पर इतना गुरुर न कर,
बैर भाव न रख तू मन में खुद….l
ठेस किसी के दिल को न पहुँचा,तू पापी कहलाएगा,
अच्छे कर्मों से खुद का मान  सम्मान बढ़ाएगा l
प्यार करेगा हर कोई तुझको,नाम जुबां पे लाएगा,
न पहुंचे दुःख तेरे कारण,दुःख से किसी को न मजबूर तू करll
चंद दिनों का ये जीवन है,खुद पर इतना गुरुर न कर,
बैर भाव न रख तू मन में,खुद….l
न अमर रहा अब तक कोई,न कोई  रह पाएगा,
प्यार भरा  रिश्ता  ही  इस जग में रह जाएगा l
इस तन का भी तू अहम् न कर,इक दिन खाक हो जाएगा,
माफ़ किए जा सबको तू,खुद को इतना मगरूर न कर ll
चंद दिनों का ये जीवन है,खुद पर इतना गुरुर न कर,
बैर भाव न रख तू मन में,खुद को सबसे दूर न कर ll
                                                            #किशोर सकलानी

परिचय :२६ वर्षीय किशोर सकलानी उत्तराखंड के चम्पावत जिले के सकदेना गाँव में रहते हैं | आपकी शिक्षा १२वीं तक हुई है| वर्तमान में दिल्ली के जहाँगीर पूरी में निवास है| स्टील पाइप के कारखाने में पर्यवेक्षक पद पर कार्यरत हैं|

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।