ज़िम्मेदारी नहीं अभी, अपनी बारी नहीं अभी। जैसे-तैसे जीत गए, वैसी पारी नहीं अभी। वक़्त नींद का हुआ भले, पलकें भारी नहीं अभी। अगल-बगल ही प्यादे हैं, मात हमारी नहीं अभी। थोड़ा वक़्त कठिन है बस, पर लाचारी नहीं अभी। #प्रदीप कान्त परिचय : इंदौर में केट कालोनी निवासी […]
