तस्वीर तेरी जब देखी,मैंने ये श्रंगार लिखा, अधरों ने तो कुछ न बोला,नैनों ने इकरार लिखा। बहती सर्द हवा के हाथों,मैंनें भी पैगाम दिए, तेरी यादों के सपनों को,जाने कितने नाम दिए। उर उपवन में खिलती कलियाँ,प्रेम-प्रेम महकाती है, सांसों की धीमी सरगम भी,नाम तुम्हारा गाती है। अंगड़ाई जब लेती […]

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  क्यों  कलम चलाऊँ अपनी मैं इन राजनीति दरबारों पर, क्यों विवश करुं लेखनी अपनी लिखने को गद्दारों पर। इन्हीं सियासत की गलियों में रोज तमाशा होता है, बुझ जाता है दीपक वो जो बस आशा का होता है॥ चंद सियासी कुनबे मेरा देश लूटकर बैठे हैं, माथे पर इक […]

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ओढ़कर श्याम के रंग की ओढ़नी इस कदर आज मीरा दिवानी हुई, भूलकर वो जहां प्रीत की रीत में प्रेम की एक पावन कहानी हुईl छोड़कर महल,त्याग सब कुछ दिया प्रीत की डोर से बाँध उसको लिया, बोल मीठे हुए खुद हुई बाँसुरी श्याम के प्रेम में बस रहे आतुरी, […]

दिन,कई दिन छिपा रहा जैसे, खौफ़ कोई सता रहा जैसेl सुबह सूरज को नींद आने लगी, अब्र चादर उड़ा रहा जैसेl एक आहट-सी लग रही मुझको, कोई पीछे से आ रहा जैसेl हम मुसाफ़िर हैं एक जंगल में, खौफ़ रस्ता दिखा रहा जैसेl उलझा-उलझा-सा एक चेहरा ही, सौ कहानी सुना […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।