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काश कोई मुझको अपना तो कहता, आँख का पानी फिर यूँ नहीं बहता। साथ चलने को उम्रभर किसने कहा, कुछ कदम गर साथ कोई चल देता। आँख का…॥ फूल मुबारक पास जिनके वो रखें, काँटों का भी हक़ ज़रा कोई देता। आँख का…॥ हस रहा हूं यूं तो हंसने के […]

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माटी के संग माटी बन खुद माटी में रम जाते हैं, अभिनंदन उन मानस का जो रोटी हमें खिलाते हैं। तपती धूप उन्हें क्या कहती,बादल भी झुक जातें हैं, तूफानों की जुर्रत क्या,वो आकर हाथ मिलाते हैं, ऊसर बीज बने इक पौधा,ऎसे उसे सहलाते हैं। अभिनन्दन उन…॥ बच्चों की किलकारी […]

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धूप में अब कहाँ वो बात है, हर तरफ ठण्ड का अहसास है। खाते थे गजक,रेवड़ी व मूंगफली, घूमा करते थे यूँ ही गली-गली… परवाह किसको थी, दिन है के रात है…। धूप में…॥ बैठ जाते थे अंगीठी घेरकर सभी, मिलेगा हलवा गाजर का अभी… भुलाकर भी भूलती नहीं, वो […]

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प्यार इक कसम, प्यारी सी रसम प्यार इंतज़ार, प्यार दीदार, प्यार दिलदार, प्यार सत्कार कभी-कभी तकरार। प्यार क्या है… प्यार इक आस, कभी ख़ुशी कभी उदास, कभी दूर, कभी पास कभी वर्तमान, कभी कभी इतिहास। प्यार क्या है… प्यार मनचला, कभी मिला कभी नहीं मिला, कभी सिला कभी गिला, कभी-कभी […]

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कहने को तो संत है,न आशा न राम, आचरण इनका देखिए,गुण्डों जैसे कामl गुण्डों जैसे काम,खुद ने यो कृष्ण बताए, दुराचार का धंधा,कब से रहो चलाएl जुड़ा नाम में राम,काम रावण ते बदतर, व्याभिचार में लीन,उमर हो गई बहत्तरl नहीं उमर की लाज,बच्ची वो पोती जैसी, शरम न आई इनको,नीयत […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।