*कलाधर छंद* श्वेत  वस्त्र  धारिणी  सुहंस  पै  रही  सवार, मातु   ज्ञान   दान   दे   सुचेतना  उभार  दे| अंधकार  हार  के  हरो  सभी  हिये   विकार, दिप्त   शुभ्र   विश्व   में   सुलोचना   पसार  दे|| तत्व  ब्रह्म  वेद  की  समस्त  ज्ञान  धारिणी  तु, लेखनी   मयूर   पंख   छंद   बंध   सार  दे| […]

हे धन्य भूमि भारती तू आन बान अरु शान है| हे मातृभूमि शरण दायनि तू जननी तू प्राण है|| तू  प्रीत  रीत   संगीत  है  पावन  तू सुख धाम  है| तू शौर्य भगत आजाद है तु श्वास में अविराम है|| गा कर के वंदेमातरम् करते सभी अराधना| सैनिक समर्पित भाव लिये  […]

सुयोग  ध्यान साधना मिटा रहे हिये  विकार| पवित्र भाव को लिये करो तु योग बार बार|| शरीर स्वस्थ स्वच्छ हो विवेक पूर्ण हो विचार| सु दिव्य देह प्राण में सु ज्ञान देत है पसार|| भुजंग सूर्य आसनः सु शक्ति देह दे अपार| सुताड वृक्ष उज्जयी कपाल भांति को सिआर|| सु […]

देख सीमाओं की दुर्दशा, लिखे शृंगार हम कैसे आंखे मौन है सब की, लिखे अंगार हम कैसे कहीं तो रो रहा है कश्मीर, कहीं हलधर दुखी होते द्रवित मन में प्रेम धन भरकर, लिखे लाचार हम कैसे हमीं कलमकारों ने हर पल, राजनीति को चेताया कैसे खुले आंँख शासन की, […]

बात आज सब मान,                रोग का करें निदान| नित दिन योग ध्यान,                प्राणायाम   कीजिए|| तन  से  न होंगे पस्त,                मन  से  रहेंगे   मस्त| योग में अपार शक्ति,     […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।