हिंदी है भाषा मात्र नहीं भारत माता का मान कहो। यह मानवता का जन्मपत्र इसको तो हिंदुस्तान कहो।         इसको संतों के आश्रम में        मर्यादाओं ने पाला है ।        इसकी साँसों में यज्ञ ,गन्ध         ऋषियों -मुनियों […]

चेहरा ये कैसा होता गर आँख नहीं होती. दिल कैसे फिर धड़कता गर आँख नहीं होती. रक़ीब से भी बदतर हो जाते कभी अपने. मालूमात कैसे होता गर आँख नहीं होती. कितना हसीन है दिल चाक करने वाला. एहसास कैसे होता गर आँख नहीं होती. कुर्सी के नीचे बर्छी आखिर […]

आपको जो देख ले वो देखता ही रह जाए, लाखों और करोड़ों में चाँद-सा ये रूप है आपको बनाने वाला आप ही हैरान-सा है, कौन-सी घड़ी में बनी सूरत अनूप है। सूरज भी शरमाए देख तेज चेहरे की, आप आएं छाँव में तो खिल जाती धूप है। फुरसत में आपको […]

कब तक रुलाओगे हंसाने की बात कर। अब छोड़ कत्लेआम बचाने की बात कर। गौर से  तू  देख जो  थमा रहा  है पत्थर, शत्रु है,काट शीश या कटाने की बात कर। रोटी न अब पकेगी मजहब की आग पर, अब हिन्द को जयहिन्द बनाने की बात कर। कश्मीर  अपनी शान […]

रूप के भँवरे चुराने जब लगें नज़रें, जब ढले श्रृंगार का मौसम चले आना। हो अकेलापन कभी महसूस जब तुमको,                                                              […]

हर गुजरते पल से थोड़ी खुशियाँ चुराइए, चमन की कली-कली को प्यार से सहलाइए। चाहते हैं हो तरक्की वतन और अवाम की, बेटियाँ बचाइए और बेटियाँ पढ़ाइए। बेटियाँ हैं भार नहीं,बेटियाँ आभार हैं, सृष्टि का दिया हुआ अमोल उपहार हैंl इनकी एक हँसी पे अपने दो जहाँ लुटाइए, बेटियाँ बचाइए […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।