युग सृजन की नव कड़ी को जोड़ती मैं, कुप्रथा की बेड़ियों को तोड़ती मैं। रश्मियों को मैं सदा आहूत करती, रुख हवाओं का प्रभंजन मोड़ती मैंll दीप को देकर सहारा दीप्त करती, मैं सदा नव मल्लिका में ओज भरती। आँधियाँ-तूफान मेरे हमसफर, काल हो-कलिकाल हो,मैं नहीं डरतीll हम अनल में […]

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छोड़ो कल की बातें कल की बात  पुरानी, नए साल में लिख दें,आओ मिलकर नई कहानी। हम हिंदुस्तानी,हम हैं नूरानी॥ आज चुनौती खड़ी हुई हैं फाड़ के सीना, दंगल और फसाद में मुश्किल हुआ है जीना। अठारह का यह साल बनाएंगे  निराला, बाहर हो जाएगा जो सब होगा काला। नई […]

  अनाचार-अत्याचार की आंधियों से स्वार्थ और पशुता के ढेर में, मिटती मानवता,जागती नश्वरता में विवेक से संवेदना की लहरों का जब-जब होता है संघर्ष, दूध से नवनीत के विलोम-सा खुलता,चिंतन और मंथन का द्वार, दृश्य और दृष्टि की भिन्नता में शरीर से जुदा आत्मा का मार्गl        […]

मेरी जीत में मेरे दुश्मनों का भी बड़ा हाथ रहा, वो खाईयां खोदता रहा मैं पहाड़ चढ़ता गया, उसके पास ईर्ष्या की कुदाली थी मेरे पास हौंसलों के पंख। मैं बढ़ता गया वह देखता रहा, जब मैं लौटा आसमां की बुलंदियां छूकर, एक हाथ में सूरज और एक हाथ में […]

गैर की नजरों से गिरे तो कोई बात नहीं, अपनी नजरों से गिरकर कहां जाइएगा। हासिल न हुई शोहरतें तो कोई बात नहीं,                                                    स्वाभिमान गिरा […]

आओ हम आज दीप बन जाएं, आओ हम मिलकर जल जाएंl दीप से दीप हजारों जलते हैं, साथ चलने की हम कसम खाएंl बुझ गए जो चिराग आंधी में, हौंसलों से रोशन कर डालेंl बन के जुगनू अंधेरी रातों में, जर्रे-जर्रे में हम बिखर जाएंl हो गए जो पतझड़ में […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।