ज़ख़्मों के उठे दर्द छुपाने नहीं आते। बिन बात यूँ हँसने के बहाने नहीं आते॥ हम जो भी हैं, जैसे भी हैं, है सामने तेरे। चेहरे पे नए चेहरे लगाने नहीं आते॥ हर शाम बिताता हूँ मैं तन्हाइयों के संग। बैठक में मेरे यार पुराने नहीं आते॥ इक बार ले […]
ख़ामोशी भी क्या गजब ढाने लगी। लब है चुप पर आँखें चिल्लाने लगी॥ है हवाओं में घुला कैसा जहर। साँस चलने से भी घबराने लगी॥ ज़ुल्म भी अब आ चुका अंजाम तक। सिसकियाँ अब ज़ोर दिखलाने लगी॥ आँखों से तेरी जो कुछ बूँदें गिरी। बन लहर वो मुझ से टकराने […]
मुझे भी किसी ने दुआओ में मांगा था, किसी माँ के दामन की टुकड़ा थी मैं l पिता ने पाला था बड़े अरमानों से, सब कहते थे कि,चाँद का मुखड़ा थी मैं ll पढ़-लिखकर कामयाब होना चाहती थी, मुकम्मल हर ख़्वाब करना चाहती थी l गुड्डे-गुड़ियों की शादियाँ रचाती […]
कहते हैं जनाब यहाँ,भरपूर रोजगार है…, कितनों का बाकी है कर कितनों का गिरवी है घर, कितनों के ऊपर देखो टूटा ये पहाड़ है… किसी की बेटी भूखी, किसी का बेटा भूखा किसी का भूखा यहाँ पूरा परिवार है,.., कोई आधा चोटिल है कोई पूरा घायल है, कोई अपने घर […]
गुल अमन के वतन पे खिलाएंगे हम। हिन्द को विश्व शक्ति बनाएंगे हम॥ देश पर मर मिटे ऐसे फ़ौजी हैं हम। हर बला से वतन को बचाएंगे हम॥ दिल धड़कता रहे जब तलक सीने में। गीत अहले वतन के सुनाएंगे हम॥ आँख जो भी उठेगी मेरे हिन्द पर। शीश उसका […]
यूँ बिना ख्वाब के तुम घर से निकलते क्यूँ हो। पाँव के छालों से डरते हो तो चलते क्यूँ हो॥ अच्छे खासे हो मियां थोड़ी तो मेहनत कर लो। यूँ जवानी में भरी बैठ के ढलते क्यूँ हो॥ धूप में रहना है तो खुद को यूँ पत्थर कर लो। बन […]
मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।
वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।