दुनिया में उसको छोड़ ना परवाह किसी की आ जाये बिना बुलाये कभी याद किसी की तस्वीर गर जो आंखों में बस जाय किसी की कहते है दुनिया वाले कि यही तो इश्क है। दीदार उनका करने को जो दिल रहे बेताब उनके बगैर दुनिया में सब कुछ लगे खराब […]

ये है वर्तमान परिवेश, ये है वर्तमान परिवेश।। दम तोड़ती है इन्सानियत,इन्सान बचा है शेष कोई है अधकचरा शिक्षक, नेतागीरी करता गपशप छोटी सी भी गलती पाकर, शिक्षक पीटे थपथप थपथप बच्चा जो स्कूल को जाये, देता है शिक्षक को गाली जब घरवाले ये सुनते है, देते शाबासी और ताली […]

ऐ दोस्त तेरी दोस्ती में सब छुपाता आ गया मेरे लिए दुश्वारियां परेशानियां साजिश किये वो कुछ भी ना कर पायेगा मैं फिर बताता आ गया। साजिश करे मैं जाउं फंस दुख हो उसे मुझे देख हस वो चाहता है द्वन्द हो आंखों में कुहरे का धुन्ध हो पर सत्य […]

हमने तो सुखे हुए समंदर देखे हैं क्या क्या खौफनाक मंज़र देखे हैं । ठूठें दरख्तों पर उजड़े हुए घोसलें इन्क़लाब करते हुए बन्दर देखे हैं । मखमली बिस्तर पे बेचैन अमीर और फक्कड़ मस्त कलंदर देखे हैं । फ़र्श से अर्श,ज़र्रे से आफताब बन मिट्टी में मिलते हुए धुरंधर […]

  उत्थान देख गांव की आँखें ये भर गई। हालात देख गांव की आँखें ये भर गई। नाली, खड़ंजे छोड़ो सब वो टूटे फूटे हैं दालान देख मुखिया की आँखें ये भर गई। महिला को चुना मुखिया था इस भोली जनता ने देखा पति -परधान तो आँखें ये भर गई। भीतर वो अपने बंगले […]

मेरी उम्मीदों पर खरा उतरेगा न ? मुझसे बिछड़ कर तू बिखरेगा न ? जुदा हो कर मरना जरूरी नहीं है मगर जिंदा रहना तुझे अखरेगा न ? न याद करना कभी,न आसूँ बहाना हाँ,पर चाँद रात को आहें भरेगा न ? कोई इल्जाम तुझ पर न आने दूँगा तू […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।