यही तो इश्क है

दुनिया में उसको छोड़ ना परवाह किसी की
आ जाये बिना बुलाये कभी याद किसी की
तस्वीर गर जो आंखों में बस जाय किसी की
कहते है दुनिया वाले कि यही तो इश्क है।
दीदार उनका करने को जो दिल रहे बेताब
उनके बगैर दुनिया में सब कुछ लगे खराब
मिलते ही खुद बखुद अगर कह जाते है आदाब
कहते है दुनिया वाले कि यही तो इश्क है।
नजरों से मिल नजरें निगाहें चार हो जाये
समझाना मन को की कहीं ना प्यार हो जाये
दिल भी हमेशा चाहे कि दीदार हो जाये
कहते है दुनिया वाले कि यही तो इश्क है।
दुनिया की नजर में नजर अन्दाज कर देना
मौका मिले महबूब को जी भर के देखना
नजरों के रास्ते किसी के दिल में उतरना
कहते है दुनिया वाले कि यही तो इश्क है।
पेंसिल से कागजों पे नाम लिखना मिटाना
खुद में ही मस्त रहना किसी को ना बताना
बिस्तर पे तकिया पकड़े हुए नींद ना आना
कहते है दुनिया वाले कि यही तो इश्क है।
दिल और दिमाग में हो जैसे छा गया कोई
ऐसा लगे कि दिल को जैसे भा गया कोई
जो भी गुरूर था वो जैसे खा गया कोई
कहते है दुनिया वाले कि यही तो इश्क है।
दिल बात करना चाहे किसी से जो देर तक
ढूंढे नजर किसी को अगर दूर दूर तक
रस्ता पहुंचने का अगर ढूंढे हुजूर तक
कहते है दुनिया वाले कि यही तो इश्क है।
संदेश देख फोन पे मुस्कान आ जाना
देखें जो आनलाइन दिल में जान आ जाना
रिप्लाइ करते करते उनका ख्वाब आ जाना
‘एहसास’ हो गया है कि यही तो इश्क है
कहते है दुनिया वाले कि यही तो इश्क है।

#अजय एहसास
अम्बेडकर नगर (उ०प्र०)

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Sun Mar 1 , 2020
इंदु भूषण बाली

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।