इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के तुलनात्मक भाषा एवं संस्कृति अध्ययनशाला, मातृभाषा उन्नयन संस्थान तथा भारतीय भाषा शिक्षण, मालवा प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय में प्रशिक्षण आयोजित किया गया। विभागाध्यक्ष प्रो. प्रीति सिंह के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का विषय ‘शिक्षा में रामत्व’ और ‘अनुवाद’ एवं ‘कविता से कमाई’ […]

हिन्दी का भाल है मातृभाषा- श्री कर्दम आवश्यकता है हिन्दी के विस्तार की- अंकुश कुमार इंदौर। हिन्दी के तकनीकी विस्तार के लिए कार्यरत मातृभाषा डॉट कॉम की 9वीं वर्षगाँठ पर रविवार को आनंद मोहन माथुर सभागृह, इन्दौर प्रेस क्लब, इन्दौर में ‘ध्येय यात्रा व कविताई’ का आयोजन किया गया, जिसमें […]

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ एक हज़ार वर्ष से अधिक की यात्रा में हिन्दी भाषा ने कई पड़ाव और प्रवाह देखे हैं। उस भाषा का सौन्दर्य इस बात का साक्षी है कि आज भारत के जनमानस के भीतर उस भाषा के प्रति अनुराग जागृत है और उसी भाषा से विश्व में […]

परिचर्चा संयोजक- डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ वर्तमान समय में देशभर में साहित्य का बोलबाला है। ऐसे दौर में महिला साहित्यकारों से समाज अधिक अपेक्षा करता भी है क्योंकि सृजन का पहला अधिकार आधी आबादी का रहा है। साहित्य जगत में महिलाओं ने अपनी भूमिका से सकारात्मकता का प्रसार किया है। […]

भारत का संविधान पर्व दिवस 26 जनवरी जनवरी को परम्परानुसार अखबारों के दफ्तरों में अवकाश रहा लिहाजा 27 जनवरी को अखबार नहीं आया और इक प्याली चाय सूनी-सूनी सी रह गयी. 28 तारीख को वापस चाय की प्याली में ताजगी आ गयी क्योंकि अखबार साथ में हाथ में था. अभी […]

माँ का जब भी लिया नाम मिल गए तभी चारों धाम माँ ही प्रभु माँ ही भगवन माँ तुझे करते नमन वंदन। माँ कभी लगे धूप छाँव सी पहेली माँ कभी पाठशाला अलबेली सी माँ कभी डांटे तो कभी पुकारती माँ जीवन मूल्य का पाठ पढ़ाती। माँ की लोरी सरिता […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।