सड़क, डंपर और गुमटी

rajnish dube
अंगारों सी तपती सड़कों पर, जब  डंपर दौड़ लगाते हैं,
मानों जैसे सौदागर जानों पर, मौत की होड़ लगाते हैं,
देती नगद हवाला मृत्यु चलते फिरते जीवन का
मोलभाव फिर कहां से होगा रफ्तार में छिनते जीवन का
एक काम करो ऐ सौदागर, कुछ सड़क किनारे गुमटी खोलो
कुछ साज सजी अर्थी रख लो, और रंग सफेद कपड़ा रख लो
जैसे उड़े देखो प्राण जीव के वैसे ही अर्थी लेकर दौड़ो….
पहचान भी कर लो फिर लाशों से पाँकिट से निकले नांतो से
और अपनी वस्तु को विक्रय करके फिर नाता जोड़ों सड़कों से
विश्वास करो ये धंधा भी उस डंपर दौड़ के साथ चले
सौदा इतना चोखा है कि कीमत इसकी नगद पटे
बस याद रखो इन बातों को कि दुर्घटना तुमसे दूर घटे
और अपने डंपर की रफ्तारें बस अपने नोटों का नाम रटे
फिर एक दिन ऐसा आएगा तुम राजतंत्र का हिस्सा होगे
ॖदेखोगे वो दिन भी जब गुमटी पे चैले तुम्हारे बैठेंगे
ना कोई चिंता सड़कों की होगी ना गुमटी की झंझट होगी
बस खादी की गर्माहट होगी और पैसों की खनखन होगी
जीवन का हिस्सा ऐसा होगा जैसे अमृत का प्याला
फर्क नहीं उस प्याले ने कितने बच्चों का छीना निवाला
होगा हिसाब बस एक हाथ में कितने डंपर कितनी गुमटी
क्या लेना देना रफ्तार में इनके कितनी बेगुनाह जानें सिमटी
मैं रजनीश तो चेत चुका इस अंधी दौड़ की महिमा से
जब नींद खुली थी अस्पताल में दो दिन के उस कौमा से
#रजनीश दुबे’धरतीपुत्र'
परिचय : रजनीश दुबे’धरतीपुत्र' की जन्म तिथि १९ नवम्बर १९९० हैl आपका नौकरी का कार्यस्थल बुधनी स्थित श्री औरोबिन्दो पब्लिक स्कूल इकाई वर्धमान टैक्सटाइल हैl  ज्वलंत मुद्दों पर काव्य एवं कथा लेखन में आप कि रुचि है,इसलिए स्वभाव क्रांतिकारी हैl मध्यप्रदेश के  के नर्मदापुरम् संभाग के  होशंगाबाद जिले के सरस्वती नगर रसूलिया में रहने वाले श्री दुबे का  यही उद्देश्य है कि,जब तक जीवन है,तब तक अखंड भारत देश की स्थापना हेतु सक्रिय रहकर लोगों का योगदान और बढ़ाया जाए l  

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।