माँ मैं माँ बनी हूँ तो अब ये सोचती हूँ
क़ि जाने कैसे तुमने मुझको पाला होगा,
मेरे हर छोटे-बड़े नखरे को
कैसे तुमने सम्भाला होगा,
मेरे रोने पर जब तुमने लिटाया होगा
गोद में शायद मेरी तरह तुमने भी,
अपने मुँह में एक निवाला ही डाला होगा…
जाने कैसे तुमने मुझको सम्भाला होगा।
आज जब काम करती हूँ तो गैस का
आविष्कार हो चुका है,
उस वक़्त तो तुमने सुलगाया होगा
मिट्टी का चूल्हा आग बढ़ाने के
लिए कंडा जलाया होगा,
जाने कैसे तुमने मुझको सम्भाला होगा।
आज जब रोती है गुड़िया तो सो जाती
है कभी-कभी गोद में ही,
और रह जाती है कमर दर्द में जकड़कर
जाने तुमने ऐसे कितने ही दर्दों को,
अपने शरीर में पाला होगा…
जाने कैसे तुमने मुझको सम्भाला होगा।
तब नहीं चलते थे ये
हगीज,पेम्पर या मम्मी पोको पेंट,
तुमने तो कितने ही रातभर के गीले
कपड़ों का लबादा सुबह सर्दी की गुनगुनी
धूप में छत पर निकाला होगा,
जाने कैसे तुमने मुझको सम्भाला होगा।
न था उस वक़्त सेरेलेक्स और न चलती
थी कुछ और खाने की चीज़,
तुमने तो अपने हाथों से मेरे लिए
सूजी का पतला पतला खीर-सा हलवा
बनाकर खिलाया होगा,
माँ जाने तुमने मुझको कैसे सम्भाला होगा।
न चलती थी उस वक़्त रिमोट की कार,
और न चलते थे सेल के खिलौने
तुमने बना-बनाकर नए चेहरे,
मेरा दिल बहलाया होगा…
जाने मुझको तुमने कैसे सम्भाला होगा।
नहीं थे उस वक़्त आज के ये वॉकर,
तुमने मुझको लकड़ी की गाड़ी से पहला
कदम चलना सिखाया होगा,
और मेरे चलने पर तुमने मुझे चूमकर
झट से गोद में उछाला होगा।
माँ जाने तुमने मुझको कैसे
सम्भाला होगा॥
स्वीटी गोस्वामी भार्गव
परिचय : स्वीटी गोस्वामी भार्गव का रिश्ता शहर आगरा(राज्य-उत्तर प्रदेश)से है। वर्तमान में यहीं निवासरत हैं। स्नातक तक शिक्षित श्रीमती भार्गव हिंदी अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं। लिखना आपका शौक है।