माँ मै सोचती हूँ

switi goswami
माँ मैं माँ बनी हूँ तो अब ये सोचती हूँ
क़ि जाने कैसे तुमने मुझको पाला होगा,
मेरे हर छोटे-बड़े नखरे को
कैसे तुमने सम्भाला होगा,
मेरे रोने पर जब तुमने लिटाया होगा
गोद में शायद मेरी तरह तुमने भी,
अपने मुँह में एक निवाला ही डाला होगा…
जाने कैसे तुमने मुझको सम्भाला होगा।
आज जब काम करती हूँ तो गैस का
आविष्कार हो चुका है,
उस वक़्त तो तुमने सुलगाया होगा
मिट्टी का चूल्हा आग बढ़ाने के
लिए कंडा जलाया होगा,
जाने कैसे तुमने मुझको सम्भाला होगा।
आज जब रोती है गुड़िया तो सो जाती
है कभी-कभी गोद में ही,
और रह जाती है कमर दर्द में जकड़कर
जाने तुमने ऐसे कितने ही दर्दों को,
अपने शरीर में पाला होगा…
जाने कैसे तुमने मुझको सम्भाला होगा।
तब नहीं चलते थे ये
हगीज,पेम्पर या मम्मी पोको पेंट,
तुमने तो कितने ही रातभर के गीले
कपड़ों का लबादा सुबह सर्दी की गुनगुनी
धूप में छत पर निकाला होगा,
जाने कैसे तुमने मुझको सम्भाला होगा।
न था उस वक़्त सेरेलेक्स और न चलती
थी कुछ और खाने की चीज़,
तुमने तो अपने हाथों से मेरे लिए
सूजी का पतला पतला खीर-सा हलवा
बनाकर खिलाया होगा,
माँ जाने तुमने मुझको कैसे सम्भाला होगा।
न चलती थी उस वक़्त रिमोट की कार,
और न चलते थे सेल के खिलौने
तुमने बना-बनाकर नए चेहरे,
मेरा दिल बहलाया होगा…
जाने मुझको तुमने कैसे सम्भाला होगा।
नहीं थे उस वक़्त आज के ये वॉकर,
तुमने मुझको लकड़ी की गाड़ी से पहला
कदम चलना सिखाया होगा,
और मेरे चलने पर तुमने मुझे चूमकर
झट से गोद में उछाला होगा।
माँ जाने तुमने मुझको कैसे
सम्भाला होगा॥

स्वीटी गोस्वामी भार्गव

परिचय : स्वीटी गोस्वामी भार्गव का रिश्ता शहर आगरा(राज्य-उत्तर प्रदेश)से है। वर्तमान में यहीं निवासरत हैं। स्नातक तक शिक्षित श्रीमती भार्गव हिंदी अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं। लिखना आपका शौक है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।