मधुमास

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meena godare
तुम न आए तो सजन लौट गया मधुमास,                                                             टूट गए सपने सारे टूट गई  आसl

सूखी तन की डारि-डारि,सूखे मन के पात,
अंसुंअन की धारा से नयन हुए पलाशl                                                               तुम न आए तो…ll

फुदक आम्र मंजिरी पै कर रही उल्लास,                                                              भोर की कोयल कुहुक करती उपहासl                                                                   तुम न आए तो,,,ll

जेठ की दुपहरी-सा सूरज का ताप,
पूनम का चंदा भी कर रहा उपहासl                                                                     तुम न आए तो,,,ll

पीरी घघरिया और हरीरी  चुनरिया,
ओढ़ के बैठी है तेरी प्रियतमा उदासl                                                                     तुम न आए तो,,,ll

खिल जाएंगी जूही-चमेली,गेंदे और गुलाब,
हाथ में तुम्हारे जब होगा मेरा हाथl                                                                      तुम न आए तो,,,ll

गलियों में भटक गई सुरभित बयार,
रेशमी कालीनों पर हो रहा विलासl                                                                     तुम न आए तो,,,ll

सूख गईं नदियां कर-करके संताप,
शीत की ऋतु देती गर्मी का त्रासl                                                                       तुम न आए तो,,,ll

भूल जो हमारी हुई भूल जाओ पाथ,
लौट आओ प्रियतम मेरे सृजन के अनुप्रासl                                                           तुम न आए तो,,,ll

तुमसे है जीवन संग चलो प्राणनाथ,
तुम जो आओगे सजन लौट आएगा मधुमासll

(रचना में दूषित पर्यावरण को रुठे प्रियतम व इंसान के दर्द को प्रेयसी के रुप में व्यक्त किया गया हैl)

        #मीना गोदरे 

परिचय : स्थाई रुप से इंदौर में निवासरत मीना गोदरे लेखन में लम्बे समय से ‘अवनि’ उपनाम से सक्रिय हैं। आपकी जन्मतिथि-११-अक्टूबर १९५६ एवं जन्म स्थान-सागर (म.प्र.) है। शिक्षा-एम.ए.(अर्थशास्त्र),संस्कृत इन डिप्लोमा एवं एनसीसी(क्रेडिट कोर्स)है। आपने धार्मिक शिक्षा में प्रथम भाग से रत्नकरंड श्रावकाचार एवं मोक्ष मार्ग तक की विधिवत परीक्षाएं उत्तीर्ण की है। अन्य शास्त्रों का भी अध्ययन किया है।कार्यक्षेत्र-इंदौर शहर ही है। सामाजिक क्षेत्र में आप रोटरी क्लब (सागर) सहित अ.भा. दिगंबर जैन महिला परिषद और सद्भावना महिला मंडल से जुड़ी रही हैं तो वर्तमान में भी प्रांतीय पदाधिकारी हैं। कुछ प्रकाशन पत्रिकाओं में सहयोगी के रुप में भी जुड़ी हुई हैं। आपकी विधा-गीत, गज़ल,कविता,कहानी,लेख, निबंध,लघुकथा और व्यंग्य है। आप ब्लॉग पर भी सक्रिय हैं। प्रकाशन में आपके नाम भक्ति गीत संग्रह-आस्था के पुंज,काव्य संग्रह ‘समुद्र के सीप’ सहित दो ग़ज़ल संग्रह,दो कहानी संग्रह एक काव्य संग्रह,दोहावली और निबंध संग्रह आदि है। कई पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन हो चुका है। आपकॊ सम्मान में शब्द शिल्पी सम्मान,भाषा सम्मान,हिंदी साहित्य सम्मान,भारत की सर्वश्रेष्ठ कवियित्री सम्मान, काव्य श्री सम्मान सहित हिंदी सेवा सम्मान, साहित्य सेवा सम्मान आदि मिले हैं।आकाशवाणी(सागर,छतरपुर व इंदौर)से १८ वर्षों से रचनाओं का प्रसारण हो रहा है तो दूरदर्शन(भोपाल)पर भी काव्य पाठ किया है। आपको कई सामाजिक संस्थाओं में २५ वर्ष से सभी पदों पर कार्यरत रहते हुए सर्वश्रेष्ठ अध्यक्ष सहित अन्य पुरस्कार एवं कनाडा से बेस्ट एम्यूनाइजेशन का भी पुरस्कार मिला है। आप ड्रेस डिजायनिंग के साथ ही हेन्डीक्राफ्ट आदि में भी कुशल हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-प्रेरणा देना,सामाजिक विघटन- रुढ़ियों को दूर करना, सकारात्मक विचारधारा द्वारा जीवन और विकास को नई दिशा देना तथा देश व समाजहित में योगदान देना है।

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matruadmin

2 thoughts on “मधुमास

  1. आभार
    स.अर्पण जी अजय जी_
    ३फरवरी २०१८ के गरिमापूर्ण कार्यक्रम के आयोजन की हार्दिक बधाईयॉ
    हिंदी मातृभाषा के प्रति समर्पण और आपका अथक परिश्रम इस सफल कार्यक्रम में देखने मिला जिसमें देश के विभिन्न स्थानों के साहित्यकार मौजूद थे सा. मुख्य अतिथि डॉ वेद प्रकाश वैदिक का ओजपूर्ण प्रेरणास्पद वक्तव्य और वरिष्ठ साहित्यकार बाजपेयी जी आचार्य नवीन जी वरिष्ठ पञकार प्रवीण जी के कर कमलों से साहित्यकारों को भाषा सारथी पुरुस्कार से सम्मानित किया गया जो हिंदी भाषा को शिखर पर ले जाने ,हमारी ऊर्जा चेतना और प्रेरणा को विस्तार देने के लिए का सराहनीय प्रयास है मातृ भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने में आप सतत प्रयत्नशील है हम सब हिंदी प्रेमी आपके साथ हैं हमे ये सम्मान प्रदान करआपने गौरवान्वित किया है हम आपके आभारी हैं अनंत शुभकामनाओं के साथ
    मीना गोदरे ,अवनि ‘

  2. आभार
    स.अर्पण जी
    ३फरवरी २०१८ के गरिमापूर्ण कार्यक्रम के आयोजन की हार्दिक बधाईयॉ
    हिंदी मातृभाषा के प्रति समर्पण और आपका अथक परिश्रम इस सफल कार्यक्रम में देखने मिला जिसमें देश के विभिन्न स्थानों के साहित्यकार मौजूद थे सा. मुख्य अतिथि डॉ वेद प्रकाश वैदिक का ओजपूर्ण प्रेरणास्पद वक्तव्य और वरिष्ठ साहित्यकार बाजपेयी जी आचार्य नवीन जी वरिष्ठ पञकार प्रवीण जी के कर कमलों से साहित्यकारों को भाषा सारथी पुरुस्कार से सम्मानित किया गया जो हिंदी भाषा को शिखर पर ले जाने ,हमारी ऊर्जा चेतना और प्रेरणा को विस्तार देने के लिए का सराहनीय प्रयास है मातृ भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने में आप सतत प्रयत्नशील है हम सब हिंदी प्रेमी आपके साथ हैं हमे ये सम्मान प्रदान करआपने गौरवान्वित किया है हम आपके आभारी हैं अनंत शुभकामनाओं के साथ
    मीना गोदरे ,अवनि ‘

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।