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फिर से न जला देना
Sat Jan 20 , 2018
ना फिर से आग लगा देना, इस प्यारे से चमन में…। बड़ी शिद्दत से पनपे हैं अंकुर अभी सौहार्द के, कलियाँ भी खिली-खिली हैं ले प्रेम की बांहों का साथ, भरे हैं घाव बैर-भाव के जो हो चुके थे बहुत गहरे, खून की नदियाँ ना बहा देना इस चहकते मधुबन […]

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