अंधियारों से घिरा है जीवन,
आओ उजाला खोजें।
अपने मन की कंदराओं में,
काबा-शिवाला खोजें॥
विष रूपी इस जग में हम,
प्रेम-प्याला खोजें।
दर्पण रूपी साहित्यिक मन में,
सूर-निराला खोजें॥
अब उड़ना है नील गगन में,
अपना रास्ता खोजें।
डरें नहीं,अब कदम बढ़ाकर,
खुद सफलता खोजें॥
#डॉ.वासीफ काजी
परिचय : इंदौर में इकबाल कालोनी में निवासरत डॉ. वासीफ पिता स्व.बदरुद्दीन काजी ने हिन्दी में स्नातकोत्तर किया है,साथ ही आपकी हिंदी काव्य एवं कहानी की वर्त्तमान सिनेमा में प्रासंगिकता विषय में शोध कार्य (पी.एच.डी.) पूर्ण किया है | और अँग्रेजी साहित्य में भी एमए किया हुआ है। आप वर्तमान में कालेज में बतौर व्याख्याता कार्यरत हैं। आप स्वतंत्र लेखन के ज़रिए निरंतर सक्रिय हैं।
Fri Jan 19 , 2018
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