उड़ने तो दो…

1
0 0
Read Time2 Minute, 20 Second
niketa sinh
अरमानों के पंख लगाकर,
दूर गगन उड़ने तो दो।
सृष्टि-सृजन जन-मन को, 
कुछ मनोरंजन करने तो दो।
कब तक जंजीरों में आखिर,
कैद रहेगी ये गुड़िया ?
गुड़िया तो गुड़िया है आखिर !
न तो है यह काँच की…
और न कागज की पुड़िया।
कितनी सदियां बीत गईं हैं,
कितने आँसू रीत गए।
कितने थे अब नहीं रहे जो,
कितनों के क्या छूट गए।
बड़ी बदल का साक्षी बनकर
भी तो ..
इंसान नहीं बदले।
अपने अंदर के पशु को, 
कैसे कहे जरा सम्भले।
जिससे है अस्तित्व, 
उसी को कैद किए जाता है क्यों ?
शत्रु अजात,औरंगजेब-सा…
खुद को दिखलाता है क्यों ?
रे मानव !
क्या मूढ़ हुआ है ?
इतना इतराता है क्यों ???
#निकेता सिंह `संकल्प`(शिखी)
 परिचय : निकेता सिंह का साहित्यिक उपनाम-संकल्प(शिखी) है। जन्मतिथि- १ अप्रैल १९८९ तथा जन्म स्थान-पुरवा उन्नाव है। वर्तमान में वाराणसी में रह रही हैं। उत्तर प्रदेश राज्य के उन्नाव-लखनऊ शहर की निकेता सिंह ने बीएससी के अलावा एमए(इतिहास),बीएड, पीजीडीसीए और परास्नातक(आपदा प्रबंधन) की शिक्षा भी हासिल की है। आपका कार्यक्षेत्र-शिक्षण(शिक्षा विभाग) है। आप सामाजिक क्षेत्र में शिक्षण के साथ ही अशासकीय संस्था के माध्यम से महिलाओं एवं बच्चों के उत्थान के लिए कार्यरत हैं। लेखन में विधा-गीतकाव्य, व्यंग्य और ओज इत्यादि है। क्षेत्रीय पत्र- पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित होती हैं। सम्मान के रुप में आपको क्षेत्रीय कवि सम्मेलनों में युवा रचनाकार हेतु सम्मान मिला है। आप ब्लॉग पर भी लेखन  में सक्रिय हैं तो उपलब्धि काव्य लेखन है। आपके लेखन का उद्देश्य-जनमानस तक पहुँच बनाना है। 

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

One thought on “उड़ने तो दो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

हाथों की लकीरें

Sat Jan 13 , 2018
जब भी बैठती हूँ, खुद के साथ अपनी हथेलियों को बड़े गौर से देखती हूँl आड़ी-तिरछी इन लकीरों, में न जाने क्या खोजती हूँl सिकोड़कर कुछ गाढ़ी, खिंची लकीरों की गहराई नापती हूँl पता नहीं,इन गहराइयों में, खुद को कहाँ तक डूबा देखती हूँ ?? सोचती हूँ,क्या सच में मेरी, […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।