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मुरली की तान
Tue Dec 26 , 2017
मुरली,माखन,प्रीति है,कृपा मिले अभिराम। ब्रजवासी फिर मुक्ति क्यों,चाहेगा घनश्याम!॥ जड़-चेतन,चर-अचर सब,मोहे खोकर ध्यान। हुई अचेतन सृष्टि सब,सुन मुरली की तान॥ भागीं मधुवन के लिए,बूढ़ी,बाल-जवान। हुईं गोपियाँ बावलीं,सुन मुरली की तान॥ झूमें,नाचे चर-अचर,भूल देश,गति,काल। कान्हा की बंशी बुने,सम्मोहन का जाल॥ […]

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