लिबास

rajeshwari
आज ठण्ड बहुत ज्यादा थी,कोहरा भी छाया हुआ था। सर्द मौसम में पड़ोस की गली सूनी पड़ी थी,जहां हर समय
छोटे-छोटे बच्चों का शोर बना रहता है,  पर सब आज अपने कच्चे-पक्के मकानों या कहें कि,झोपड़ियों में दुबके हुए थे।  जिनके तन पर गर्म कपड़ों की बात तो दूर,तन ढंकने को भी लिबास मयस्सर नहीं थे,वो इस ठण्ड में कैसे खेलते-कूदते ? सब बेबसी में दुबके हुए थे। उसका मन कसेला-सा हो गया। प्रभु की कैसी लीला  थी-एक तरफ तो धनवानों की बड़ी-बड़ी कोठियां और पिछवाड़े नंगे बदन मासूमियत…शरारती ठण्ड ने हंसी छीन ली थी उन मासूमों की। उससे रहा नहीं गया। वो रोज उस गली से गुजरती थी, जहाँ उन बच्चों की शैतानी,मासूम बदमाशियां और फिर हाथ जोड़कर ‘नमस्ते मेडम..’ होंठों पर मुस्कराहट  के साथ लाकर कहना और छुप जाना। वो उनकी भोली शरारत पर निहाल हो जाती थी। उसका मन करता कि,इनको खूब प्यार करुं,इनके लिए कुछ करुं। वह खुद भी लाचार थी,पर आज उसने ठान लिया कि कुछ तो करेगी,और उसने घर में जितने भी पुराने गर्म कपड़े जो उसके पोते-पोतियों को नहीं अाते थे तथा शाल-स्वेटर-कम्बल सब लेकर चल पड़ी। पड़ोसियों ने देखा तो कहने लगे-इतनी ठण्ड में कहां जा रही हो पोटला ले के!  जब उसने सारी बात बताई तो बोली-रुको,मैं भी चलती हूं। जब हम वहां पहुंचे तो दुबका बचपन खिलखिला पड़ा कि,  अब हमको ठण्ड से कुश्ती नहीं लड़नी पड़ेगी,और डरना नहीं पड़ेगा। गर्म कपड़े देखकर उनके माता-पिता हाथ जोड़कर कृतज्ञ नजरों से देख रहे थे,शायद उसके मन में भी अब संतुष्टि के भाव थे।

                                  #श्रीमती राजेश्वरी जोशी

परिचय : श्रीमती राजेश्वरी जोशी का निवास अजमेर (राजस्थान) में है। आप लेखन में मन के भावों को अधिक उकेरती हैं,और तनुश्री नाम से लिखती हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।