मुखौटे में आदमी

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kumari archana
आदमी मुखौटा है,
या मुखौटे में आदमी
ये पहेली अनसुलझी है।
कौन असली होकर,
भी नकली-सा है
और कौन नकली होकर
असली-सा है।
कलयुग में ये फेर
समझना मुश्किल है।
कौन सच्चा,
कौन झूठ है
तराजू से तौलना कठिन है,
क्योंकि झूठ सौ बार कहकर
सच बन जाता,
सच चिल्ला-चिल्लाकर भी
झूठ का झूठ रह जाता।
मुखौटा एक त्योहार भी है जहाँ,
बेहरुपिया बारह रूप बदलता है
जब जिसकी जरूरत वो
लगा लेता है,
दूसरे को उतार देता है
वैसे ही इन्सान है,
सदा एक रुप में नहीं रहता।
कभी शैतानों के
भेष में छुपकर,
तमाशा देख रहा होता
तो कभी सच्चा इन्सानों से
तमाशा करवा रहा होता,
एक तो हम भगवान के
इशारों पर नाच रहे होते,
दूजा मुखौटे के अदृश्य चेहरे के
जो ऊपर से भोला-भाला-सा लगता है,
पर अंदर से बड़ा गंदा है
जैसे पर्यावरण में फैलता प्रदूषण हो,
और समाज में छुपा शैतान
डरावनी रात-सा,
असुरक्षित हो जाता
स्त्री की लाज,
और आदमी की जान
प्रदूषण जैसी पूरे वातावरण में
ज़हर फैलाना चाहता,
वैसे शैतान सबको अपने
प्रतिरूप-सा बनाना चाहता।
मुखौटा तो हर कोई पहने,
शराफ़त के रूप दिखाता
पर हर कोई शरीफ़ नहीं है।
एक मुखौटा नेता,
तो दूजा अभिनेता
तीजा चिकित्सक,अभियंत्री
चौथा समाजसेवी,
पाँचवा साहित्यकार पहने है
छठा आधुनिक गुरु,
साँतवा पुलिसवाला
आँठवा काला कोट वाला,
नवाँ प्रशासक
दसवाँ सेवक चपरासी,
समाज में सारी समस्याओं के
कर्ताधर्ता बने हुए हैं,
पर केवल दिखावटी है
कोई कागज पर करता
कोई कानून बना,
कोई योजनाओं पर
कोई योजना बना करता,
कोई निविदा ले
कोई दवा की पर्ची पर,
कोई सरकारी राशि लेकर
फिर व्यवस्था वैसे ही रह जाती,
बस मामूली बदलाव-सा दिखता
क्योंकि एक मुखौटा उतारता है,
दूसरा उसे फिर लगा लेता॥
                                                              #कुमारी अर्चना

परिचय: कुमारी अर्चना वर्तमान में राजनीतिक शास्त्र में शोधार्थी है। साथ ही लेखन जारी है यानि विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में निरंतर लिखती हैं। आप बिहार के जिला हरिश्चन्द्रपुर(पूर्णियाँ) की निवासी हैं।

matruadmin

One thought on “मुखौटे में आदमी

  1. बहुत ही कालजयी रचना लिखी अर्चना जी आपने जो समाज की वर्तमान दुर्दशा को उजागर करती है । बहुत खूब ।

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।