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जान बची-लाखों पाए
Sat Dec 16 , 2017
सुबह-सुबह चूहा, सेंक रहा था धूप। बिल्ली मौसी ओढ़, कर कंबल बैठी थी चुप॥ कुत्ता तान रहा था, अपनी टेढ़ी पूंछ। देखकर बिल्ली मौसी, ने लगाई दौड़ खूब॥ चूहे ने खैर मनाई जीभर के खाई गुपचुप। मौसी और कुत्ते के बैर से चूहा नाचा होकर खुश॥ […]

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